भोपाल22अगस्त26*सांप दिखे या डसे, तुरंत मिलेगी मदद: MP में वन विभाग ला रहा ‘शिवा एप’, घर बैठे बुला सकेंगे स्नेक रेस्क्यूअर*
भोपाल। मध्य प्रदेश में सर्पदंश की घटनाओं पर अंकुश लगाने और इंसानों के साथ-साथ सांपों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग एक बड़ा नवाचार करने जा रहा है। प्रदेशभर के सांप पकड़ने वाले विशेषज्ञों (स्नेक रेस्क्यूअर्स) का डेटाबेस तैयार कर ‘शिवा एप’ बनाया जा रहा है। इस डिजिटल पहल के जरिए आम नागरिक अपने मोबाइल में जीपीएस लोकेशन ऑन करके नजदीकी रेस्क्यूअर को अपने घर या आसपास बुला सकेंगे।
*’शिवा एप’ की प्रमुख विशेषताएं*
*जीपीएस ट्रैकिंग से त्वरित मदद:* एप यूजर की लाइव लोकेशन के आधार पर सबसे पास मौजूद प्रमाणित स्नेक रेस्क्यूअर को सूचना भेजकर बुलाने की सुविधा देगा।
*प्राथमिक उपचार का मार्गदर्शन:* यदि किसी व्यक्ति को सांप ने काट लिया है, तो एप तुरंत फर्स्ट-एड गाइडेंस प्रदान करेगा।
*एंटी-वेनम अस्पताल की लोकेशन:* सर्पदंश की स्थिति में ऐप नजदीकी उन स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी और लोकेशन बताएगा, जहां एंटी-स्नेक वेनम (इलाज का टीका) उपलब्ध है।
*रेस्क्यूअर्स को मिलेगा एक साल का लाइसेंस*
वन विभाग हर साल प्रदेश के स्नेक रेस्क्यूअर्स को विशेष ट्रेनिंग देगा और उन्हें एक वर्ष की वैधता वाला आधिकारिक लाइसेंस जारी करेगा। रेस्क्यूअर्स को हर साल इस लाइसेंस का रिन्यूअल कराना अनिवार्य होगा।
*वन्यजीव सप्ताह (2 से 8 अक्टूबर) में होगा लॉन्च*
पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) समीता राजौरा के अनुसार, इस ऐप को 2 से 8 अक्टूबर के दौरान आयोजित होने वाले ‘वन्यजीव सप्ताह’ के अवसर पर लॉन्च किया जाएगा।
*देश में सबसे ज्यादा सर्पदंश मौतें मप्र में*
मध्य प्रदेश में यह कदम इसलिए भी बेहद जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में हर साल सर्पदंश के कारण 2,500 से 2,800 लोगों की मृत्यु हो जाती है। सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में मध्य प्रदेश का यह आंकड़ा पूरे देश में सबसे अधिक है।

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