April 19, 2024

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झाँसी03अक्टूबर*नारे सुआटा खेलने के साथ युक्तियों ने बनाई रंगोली।

झाँसी03अक्टूबर*नारे सुआटा खेलने के साथ युक्तियों ने बनाई रंगोली।

झाँसी03अक्टूबर*नारे सुआटा खेलने के साथ युक्तियों ने बनाई रंगोली।

झांसी 03 अक्टूबर 2022 । शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर आठवीं तिथि तक नवयुक्तियों द्वारा नारे सुआटा का खेल सुबह की बेला में बुंदेली गीतों की मधुर आवाज में गाकर खेला जा रहा है। बहुत पुरानी परंपरा के चलते ग्राम पंचायत खिलारा व अन्य ग्रामों की युक्तियों द्वारा यह खेल सुबह की बेला में खेला जा रहा है। जिसमें नव युक्तियां सुबह सुबह गीत गाते हुए कहती है कि रोजई हो बारे सूरज, रोजई हों बारे चंदा, तांती का लपलप खैहों बासी का कौर न देहों नारे सुआटा का खेल अनोखे अंदाज में खेल रही है। इस बारे में युवतियों ने बताया की दीवाल या पेड़ पर मिट्टी से एक दानव राक्षस की तस्वीर एक दिन पूर्व बनाकर आकृति का रूप अमस्या को दिया जाता है। इसके बाद आठ दिनों तक प्रतिदिन सुबह की भोर दिन निकलने से पहले मिट्टी से बनाएं गए पुतले का पूजन अर्चन कर रंगोली बनाकर विभिन्न रंगों से सजाई जाती है। सोमवार को नारे सुआटा के नाम से मिट्टी के बर्तन में झिरिया को सिर पर रखकर घर घर जाकर अन्नदान मांगा गया। तथा नौवीं तिथि को राक्षस की बनाई गई आकृति का विसर्जन नदी में कर दिया जायेगा। इस संबंध में ग्राम बरुआमाफ के बुजुर्ग किसान फेरनलाल कुशवाहा का कहना है कि द्वापर युग में भौमासुर नाम का एक राक्षस हुआ करता था। जो कुंआरी लड़कियों को जबरन बंदी बनाकर उनसे स्यंम की पूजा करवाता था। जिससे उससे अन्य कन्याएं भी भयभीत होकर शरण में रहने को मजबूर हो जाती थी। जिससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने श्रीकृष्ण भगवान की आराधना कर दानव से मुक्ति दिलाने के लिए कहा। और जब श्रीकृष्ण भगवान ने भौमासुर दानव से कहा कि यैसा क्यों करते हो तो राक्षस ने कहा कि आप मेरा वध करने से पहले मुझे वरदान दो कि कलयुग में भी मेरी पूजा कुंवारी लड़कियां करेंगी जिससे मैं उन्हें परेशान नही करुंगा। भगवान ने कहा कि तुम्हारी पूजा साल में सिर्फ एक बार शारदीय नवरात्र के समय कन्याएं करेगी। लेकिन तुम्हारा पाप इतना बढ़ गया है कि वध तो करना ही पड़ेगा जिससे भगवान ने दानव को मारकर कैद में रहने वाली सभी कन्याओं को मुक्त कराया। जिससे नवयुक्तियों ने भगवान से कहा कि हम तो दोषी माने जाएंगे और मेरे जीवन का क्या होगा तो भगवान ने उन्हें अपनी शरणागति में लेकर गोपियों का रूप देकर अपना लिया था। तभी से यह परम्परा चली आ रही है जिससे भौसासुर राक्षस की व्याधियों से बचने के लिए लड़कियां उसकी पूजा अर्चना करती है।

झांसी से सुरेन्द्र द्विवेदी की रिपोर्ट यूपी आजतक।

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