October 2, 2026

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इटावा10सितम्बर*परशुराम सेवा समिति उ.प्र. की समस्त इकाइयां भंग*

इटावा10सितम्बर*परशुराम सेवा समिति उ.प्र. की समस्त इकाइयां भंग*

इटावा10सितम्बर*परशुराम सेवा समिति उ.प्र. की समस्त इकाइयां भंग*

इकदिल, इटावा- परशुराम सेवा समिति उ.प्र. की प्रदेश, जिला व नगर की समस्त इकाइयां भंग कर दी गयीं है l उक्त जानकारी देते हुए परशुराम सेवा समिति उ. प्र. के प्रदेश अध्यक्ष डा. सुशील सम्राट ने बताया कि प्रदेश कार्यकारिणी, जिला कार्यकारिणी व नगर कार्यकारिणी एवं महिला प्रकोष्ठ इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है l प्रदेश अध्यक्ष डा. सुशील सम्राट ने आगे बताया कि शीघ्र ही सदस्यता अभियान शुरू किया जायेगा उसके बाद समस्त इकाइयों का पुनः गठन किया जायेगा l नयी कमेटी में सक्रिय व लगनशील लोगों को ही पद दिये जायेगें l उन्होेंने बताया कि एक सप्ताह के अंदर नगर, जिला व प्रदेश स्तर पर सदस्यता प्रभारी नियुक्त किये जायेगें

Taza Khabar

मुजफ्फरनगर, 2 अक्टूबर 2026 रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर पहुंचे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी किया शहीदों का नमन,,,,,, लोकेन्द्र गौतम ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल यूपीआजतक रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्य आंदोलनकारियों, शहीदों के परिजनों और अन्य लोगों ने भी शहीदों को नमन किया। कार्यक्रम स्थल पर माहौल भावुक रहा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण में राज्य आंदोलनकारियों और अमर शहीदों का योगदान, संघर्ष और बलिदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उस दिशा में आगे बढ़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने शहीदों के बलिदान को प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत बताते हुए उनके सपनों और संकल्पों को आगे बढ़ाने की बात कही। 1994 की घटना की याद में जुटे आंदोलनकारी रामपुर तिराहा उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है। 2 अक्टूबर 1994 को अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली जा रहे थे। रामपुर तिराहा पर उन्हें रोके जाने के दौरान पुलिस फायरिंग हुई। इस घटना में सात राज्य आंदोलनकारी शहीद हुए थे और कई आंदोलनकारी घायल हुए थे। घटना के बाद रामपुर तिराहा उत्तराखंड आंदोलन के संघर्ष और बलिदान के प्रमुख प्रतीक के रूप में जाना जाने लगा। रिपोर्टों के अनुसार रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए सात आंदोलनकारियों में रविंद्र रावत उर्फ गोलू, सतेंद्र चौहान, गिरीश भदरी, राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश नेगी और अशोक कुमार शामिल थे। अशोक कुमार की बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी। हर वर्ष शहीद स्मारक पर होता है श्रद्धांजलि कार्यक्रम,,, रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पर प्रत्येक वर्ष 2 अक्टूबर को राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उत्तराखंड से राज्य आंदोलनकारी और शहीदों के परिजन भी इस अवसर पर यहां पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इससे पहले भी रामपुर तिराहा पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे चुके हैं। शहीदों की स्मृति को स्थायी रूप देने की दिशा में कदम,,, रामपुर तिराहा कांड के सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं शहीद स्थल पर लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी इस वर्ष चर्चा रही। 2 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार सभी सात शहीदों की प्रतिमाएं लगाने के लिए पूर्व में जारी शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। *सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम* ,,, मुख्यमंत्री के रामपुर तिराहा कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरनगर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। कार्यक्रम स्थल के आसपास पुलिस बल तैनात रहा और यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी गई। प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। रामपुर तिराहा पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए किए गए लंबे आंदोलन और उसमें अपने प्राणों की आहुति देने वाले आंदोलनकारियों के बलिदान को स्मरण कराया। शहीद स्मारक पर मौजूद लोगों ने अमर शहीदों को नमन करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को याद किया।