लखनऊ23 अप्रैल26**नगर निगम के आदेश पर राष्ट्रमार्ग पर लग रही सवारी ढोने वाले वाहन…*
*सवारी ढोने वाली गाड़ियों को शरण देता नगर निगम परिवर्तन, हाथ सेकने के लिए पुलिस विभाग और यातायात भी हिस्सेदार…*
*अतिक्रमण पर अभियान चलवातीं मेयर साहिबा, धज्जियां उड़वाते नगर निगम परिवर्तन के अधिकारी…*
लखनऊ
राजधानी लखनऊ में जब विभाग ही अनुमति दे दे अवैध सवारी ढोने वाली टैक्सियों को, तो कहां की कार्यवाही और कौन करेगा कार्यवाही…
जिम्मेदार जब स्वयं ही अवैधता को बढ़ावा देने में दिलचस्पी दिखा रहे हों, तो अवैध पर कार्यवाही कहां से होगी…?
हैरत की बात है कि लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रमार्ग पर अतिक्रमण और अवैध चलन में सक्रियता बरकरार रखे वाले अवैध गैर जनपदीय टैक्सियों को सहयोग और संरक्षण प्रदान करने वाला लखनऊ नगर निगम है और नगर निगम द्वारा दिए गए आदेश पर पुलिस और यातायात भी हाथ सेकने में पीछे नहीं…
अतिक्रमण पर पाबंदी लगाने में नाकाम नगर निगम, स्वयं ही अवैध टैक्सियों को राष्ट्रमार्ग पर खड़े होने की अनुमति भी दे रहा है और बढ़ावा भी दे रहा है। वहीं नगर निगम द्वारा दिए गए संरक्षण और सहयोग से अवैध टैक्सियां भी अपनी भूमिका निभाने में पीछे नहीं, नगर निगम की मदद और सहारे से राष्ट्रमार्ग पर जाम भी लगवाती हैं और अतिक्रमण भी फैलाती हैं। वैसे भी नगर निगम के द्वारा दिए गए आदेश पर अवैध टैक्सियां खड़ी होंगी तो पुलिस और यातायात कार्यवाही क्यों करेगी ..?
*वही बात करें नगर निगम की तो आदेश होने पर कबूल भी नहीं करते कि आदेश हुआ है और नकार भी नहीं पा रहे…*
लखनऊ नगर निगम परिवर्तन के सहायक अभियंता ए.के सिंह द्वारा बताया जाता है कि आदेश नहीं हुआ है, लेकिन जब गंभीरता से पूछा जाता है कि आदेश की कॉपी जब पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों के टेबलों पर पहुंच चुकी हैं, तो इसपर उनकी प्रतिक्रिया पहले तो टाला मटोल में, फिर बाद में न सुनने का बहाना। ऐसा भी पता चला कि किस व्यक्ति को नगर निगम ने अवैध टैक्सियों को खड़ा करने का ठेका ही दे रखा है। और तो और वह व्यक्ति सहायक अभियंता और परिवर्तन के कई अधिकारियों के संपर्क में भी है, तो फायदा तो सभी को पहुंच ही रहा होगा। फिर कार्यवाही करने में ढिलाई और नौटंकी क्यों ना करें…?
बड़े ही हैरत और इत्तेफाक की बात है कि एक तरफ लखनऊ महापौर सुषमा खर्कवाल अतिक्रमण पर नगर निगम द्वारा अभियान चलवा रही हैं, वहीं नगर निगम परिवर्तन के अधिकारी जैसे सहायक अभियंता ए.के सिंह एवं उनका साथ देने वाले अधिकारी ऐसे अभियान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अपने कार्यालय पर बैठकर अभियान के विषय पर हंसी उड़ाते हैं। वहीं इस विषय में पूछने वाले को अपनी उपलब्धियां भी गिनवाते हैं। यदि महापौर एवं उच्च अधिकारी के निर्देश पर अतिक्रमण मुक्त कराने और लखनऊ जिले में चलने वाली टैक्सियों के स्टैंड निर्धारित किए गए हैं, वहीं परिवर्तन के अधिकारी गैर जनपदीय टैक्सियों को सहयोग और संरक्षण क्यों प्रदान कर रहे हैं…?
जब महापौर के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं तो सरकार और प्रशासन को भी नहीं छोड़ते होंगे। जब नगर निगम परिवर्तन के अधिकारी अपनी कुर्सियों और टेबल पर अपनी ही योजना बनाने में दिलचस्पी रखते हों, तो सरकार और प्रशासन की छवि को मजबूत कहां कर पाएंगे..?, वहीं महापौर के उद्देश्य को भी टेबल की दराजों में ही सीमित रखते ही होंगे…?

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