August 3, 2026

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प्रयागराज/लखनऊ3 अगस्त26*बड़ी खबर | NCLT में LDTA विवाद पर सुनवाई जारी, चर्च संपत्तियों और सदस्यता पर उठे सवाल*

प्रयागराज/लखनऊ3 अगस्त26*बड़ी खबर | NCLT में LDTA विवाद पर सुनवाई जारी, चर्च संपत्तियों और सदस्यता पर उठे सवाल*

प्रयागराज/लखनऊ3 अगस्त26*बड़ी खबर | NCLT में LDTA विवाद पर सुनवाई जारी, चर्च संपत्तियों और सदस्यता पर उठे सवाल*

*NCLT के आदेश में कई दावेदारों का जिक्र, ROC बोला—2011 से कंपनी अधिनियम के अनुपालन नहीं; अगली सुनवाई 10 अगस्त को*

प्रयागराज/लखनऊ*Lucknow Diocesan Trust Association (LDTA) से जुड़े विवाद में NCLT, इलाहाबाद बेंच की 31 जुलाई 2026 की सुनवाई के बाद चर्च समुदाय में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

न्यायालयीन आदेश के अनुसार, LDTA का अधिकृत प्रतिनिधि होने का दावा कई पक्ष कर रहे हैं। वहीं Registrar of Companies (ROC) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आपसी विवादों के कारण वर्ष 2011 से कंपनी अधिनियम के आवश्यक अनुपालन नहीं किए गए हैं। न्यायाधिकरण ने कंपनी के निष्पक्ष संचालन के लिए प्रशासक (Administrator) नियुक्त करने के पहलू पर भी विचार किया है।

इससे पहले न्यायाधिकरण LDTA की अचल संपत्तियों पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने तथा न्यायालय की अनुमति के बिना किसी तीसरे पक्ष का हित (Third Party Interest) न बनाने का अंतरिम निर्देश भी दे चुका है।

इसी बीच चर्च समुदाय में सवाल उठ रहे हैं कि जब संस्था का प्रबंधन और अधिकार न्यायालय में विचाराधीन है, तो सदस्यता, रजिस्ट्री और जमीन आवंटन जैसे दावे किस वैधानिक आधार पर किए जा रहे हैं? कई लोग इन मुद्दों पर पारदर्शिता और आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।

NCLT ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को दोपहर 12:30 बजे तय की है।

महत्वपूर्ण सूचना:: यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और किसी भी पक्ष के अधिकारों पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। ईसाई समुदाय से अपील है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूहों या अन्य डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित किसी भी दावे या संदेश पर बिना आधिकारिक पुष्टि के विश्वास न करें। किसी भी सदस्यता, रजिस्ट्री, भूमि आवंटन या अधिकार संबंधी जानकारी पर भरोसा करने से पहले संबंधित वैधानिक दस्तावेजों और सक्षम न्यायालय के आदेशों की पुष्टि अवश्य करें। अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से बचें तथा किसी भी प्रकार के भ्रम में न आएं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम कानूनी स्थिति का निर्धारण केवल सक्षम न्यायालय के अंतिम निर्णय से ही होगा।

 

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