पंजाब 09 नवम्बर 2023* पंजाब कॉटन फैक्ट्री एंड जीनर्स एसोसिएशन ने सरकार के नकारात्मक रवैये पर रोष जताया है
संवाददाता – पंजाब से सत्यनारायण शर्मा की रिपोर्ट, न्यूज़ यूपीआजतक
अबोहर। अपनी मांगों केे समर्थन में पिछले कई दिनों से हड़ताल पर चल रहे पंजाब कॉटन फैक्ट्री एंड जीनर्स एसोसिएशन ने सरकार के नकारात्मक रवैये पर रोष जताया है। फैक्ट्री संचालकों की ओर से लगातार पिछले डेढ़ सप्ताह से हड़ताल की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। हालांकि गत दिनों फैक्ट्री संचालकों ने बल्लुआना के विधायक अमनदीप सिंह गोल्डी मुसाफिर से भी मुलाकात की थी और उनसे मांग की गई कि सरकार से बात करके उनका मसला हल करवाएं। संगठन के पंजाब प्रधान श्री एसके बांसल ने बताया कि एक ओर जहां पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा राज्य में उद्योगों को बढावा देने की बात कही जा रही है तो वहीं सरकार की व्यापारी विरोधी नीतियों के चलते राज्य भर की कॉटन फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में पंजाब सरकार ने राज्य भर की कॉटन फैक्ट्रियां पर सैस टैक्स लगाया था और उस समय राज्य में करीब 298 फैक्ट्रियां थीं लेकिन अब इन की संख्या मात्र करीब 48 रह गई है। जब सरकार ने यह टैक्स लगाया था तो पंजाब सरकार को खुद छह वर्षों तक इस टैक्स को वसूलने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी लेकिन वर्ष 2011 में सरकार ने इस टैक्स वसूली का काम सेल टैक्स विभाग को दिया गया। जिस पर समस्त व्यापारियों ने वर्ष 2013 में बादल सरकार से मिलकर इस टैक्स को न वसूलने की मांग की, जिस पर पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि यह टैक्स व्यापारियों से नहीं वसूला जाएगा और तब से लेकर अब तक किसी भी सरकार ने यह टैक्स व्यापारियों से नहीं वसूला। अब आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद राज्य भर के व्यापारियों को एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि सभी कॉटन फैक्ट्रियों का 290 करोड़ रुपए बकाया है और उस पर करीब 1 हजार करोड़ रुपए की ब्याज की भी देनदारी है। जिसे शीघ्र अदा किया जाए। जिसके रोष स्वरूप एसोसिएशन के पदाधिकारियों के एक शिष्टमंडल ने 12 अक्टूबर 2023 को वित्तीय मंत्री पंजाब हरपाल सिंह चीमा से मिलकर उन्हें स्पष्ट किया है कि उनके पास इतनी भारी भरकम टैक्स की अदायगी करने का पैसा नहीं है। सरकार की इस कार्रवाई के रोष स्वरूप 30 अक्तूबर से लगातार हड़ताल की जा रही है और इस हड़ताल के दौरान भर में जितनी भी फैक्ट्रियां है, वह मंडियों में से नरमा नहीं खरीद रही। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस मसले संबंधी कोई फैसला लिया जाए। यदि सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार न किया, तो वह काली दीवाली मनाने को मजबूर होंगे।

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