कौशाम्बी10मई26*सावित्री बाई फुले के नाम पर बने विद्यालय का नाम बदलने पर विरोध,संगठन ने सरकार से की पुनः बहाली की मांग*_
_*नारी शक्ति वंदन ,महिला सशक्तिकरण,महिला आरक्षण भाजपा की दिखावा नीति,सरकार बहुजन समाज में जन्मे गुरुओं संतो व महापुरूषों के नाम मिटाने पर आमादा –_क्रांति ज्योति सावित्री बाई फूले फाउंडेशन*_
_*अझुवा कौशाम्बी* कोईलहा स्थित सावित्रीबाई फुले राजकीय बालिका आश्रम पद्धति विद्यालय का नाम दोबारा बदले जाने के बाद जिले में सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले फाउंडेशन( अनिल कुशवाहा)सहित कई सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए इसे बहुजन समाज के महापुरुषों और महिला शिक्षा आंदोलन के इतिहास से छेड़छाड़ बताया है।संगठन ने विद्यालय का मूल नाम पुनः बहाल करने की मांग उठाई है।_
_संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों के बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश भर में विभिन्न संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर आश्रम पद्धति विद्यालयों की स्थापना कराई गई थी। इसी योजना के तहत कौशाम्बी के कोईलहा में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और महिला शिक्षा आंदोलन की अग्रदूत माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर बालिका विद्यालय की स्थापना हुई थी।फाउंडेशन के सदस्यों का आरोप है कि वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद विद्यालय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय बालिका आश्रम पद्धति विद्यालय कर दिया गया।_
_इसके विरोध में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक आंदोलन चलाया और राष्ट्रपति, राज्यपाल,मुख्यमंत्री तथा जिला प्रशासन को लगातार ज्ञापन सौंपे।संगठन का दावा है कि करीब तीन वर्षों तक चले संघर्ष के बाद सितंबर 2021 में सरकार ने विद्यालय का मूल नाम पुनः बहाल कर दिया था।अब अप्रैल 2026 में विद्यालय का नाम फिर बदलकर जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय किए जाने से एक बार फिर विरोध शुरू हो गया है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर *नारी शक्ति वंदन*, *महिला सशक्तिकरण* और *महिला आरक्षण* जैसे नारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर देश की प्रथम महिला शिक्षिका के नाम को सरकारी संस्थानों से हटाया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि बहुजन समाज के महापुरुषों की पहचान और विचारधारा को कमजोर करने का प्रयास है।फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले केवल एक ऐतिहासिक नाम नहीं बल्कि महिलाओं, दलितों और वंचित समाज के शिक्षा अधिकार की प्रतीक हैं। उन्होंने ऐसे दौर में लड़कियों को शिक्षा देने का कार्य शुरू किया था, जब समाज में महिलाओं और पिछड़े वर्गों की शिक्षा का घोर विरोध होता था। ऐसे में उनके नाम से बने संस्थानों का सम्मान बनाए रखना समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।संगठन ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि विद्यालय का मूल नाम सावित्रीबाई फुले राजकीय बालिका आश्रम पद्धति विद्यालय, कोईलहा कौशाम्बी तत्काल बहाल किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि यदि सरकार अन्य महापुरुषों के नाम पर विद्यालय खोलना चाहती है तो नए संस्थानों की स्थापना करे, लेकिन पहले से स्थापित विद्यालयों के नाम न बदले जाएं।इस मुद्दे को लेकर जिले में सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस विषय पर आंदोलन और ज्ञापन कार्यक्रम तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।_

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