कौशाम्बी 5 नवम्बर 26*ओडीओपी योजना के तहत केला एवं अमरूद ट्रेड प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन, लाभार्थियों को मिला आत्मनिर्भरता का हुनर*
*विश्वनाथ प्रसाद महाविद्यालय मूरतगंज में आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्वरोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर*
*हर्रायपुर कौशाम्बी।* उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत जनपद कौशाम्बी में केला एवं अमरूद ट्रेड कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन विश्वनाथ प्रसाद महाविद्यालय,मूरतगंज,में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर केला एवं अमरूद उत्पादन से जुड़े लाभार्थियों को आधुनिक तकनीकों एवं व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना तथा रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम का आयोजन उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन विभाग तथा जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र,के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण का संचालन उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड (यूपी कॉन) द्वारा किया गया। समापन कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों के कौशल और उनके अनुभवों को साझा किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से लाभार्थियों को केला एवं अमरूद उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता संवर्धन तथा विपणन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय किसानों, कारीगरों एवं उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाना और जनपद के कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा देना रहा। इस अवसर पर जिला उद्योग सहायक प्रबंधक जीत लाल सीएम युवा के भानु प्रताप, कार्यक्रम जिला समन्वयक क्षत्रधारी सिंह सहित उद्योग विभाग के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ट्रेनर अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि ओडीओपी योजना के माध्यम से जनपद के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कौशाम्बी में केला और अमरूद प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल हैं। ऐसे में इनसे जुड़े लोगों को तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
*स्वरोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा*
योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ लाभार्थियों की कार्यक्षमता में वृद्धि, रोजगार के अवसरों का सृजन तथा आर्थिक विकास को गति देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को उम्मीद है कि वे अपने हुनर का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना पाएंगे। समापन कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि स्थानीय कृषि उत्पादों को आधुनिक तकनीक और कौशल से जोड़कर न केवल किसानों एवं उद्यमियों की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
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