November 5, 2026

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कुशीनगर 5 नवम्बर 26*“जिस्म नहीं दिया तो पद नहीं मिला!” कुशीनगर में भाजपा की महिला पदाधिकारी के आरोपों से संगठन पर उठे सवाल।

कुशीनगर 5 नवम्बर 26*“जिस्म नहीं दिया तो पद नहीं मिला!” कुशीनगर में भाजपा की महिला पदाधिकारी के आरोपों से संगठन पर उठे सवाल।

कुशीनगर 5 नवम्बर 26*“जिस्म नहीं दिया तो पद नहीं मिला!” कुशीनगर में भाजपा की महिला पदाधिकारी के आरोपों से संगठन पर उठे सवाल।

— पूनम जायसवाल, भाजपा महिला मोर्चा की जिला मीडिया प्रभारी

कुशीनगर में भाजपा की एक महिला पदाधिकारी के नाम से सामने आए वीडियो ने पार्टी संगठन के भीतर महिलाओं की भूमिका, सम्मान और पदों के बंटवारे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूनम जायसवाल का आरोप है कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया, अपना पैसा खर्च किया, लेकिन संगठन में उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली। उन्होंने इसके पीछे बेहद गंभीर और आपत्तिजनक परिस्थितियों का आरोप लगाया है।
यह मामला किसी विपक्षी नेता की तरफ से लगाया गया राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि पार्टी से जुड़ी एक महिला पदाधिकारी की अपनी नाराजगी और शिकायत है। हालांकि, उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सवाल सिर्फ एक पदाधिकारी को पद मिलने या न मिलने का नहीं है। सवाल यह है कि राजनीतिक दलों में महिला कार्यकर्ताओं की मेहनत, योगदान और सम्मान को किस आधार पर आंका जाता है?
अगर आरोप गलत हैं तो संगठन को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और अगर इनमें सच्चाई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात तभी सार्थक होगी, जब उन्हें संगठन के भीतर भी बराबरी, सम्मान और सुरक्षित माहौल मिले।
क्या राजनीतिक दलों में महिला कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए?
क्या पूनम जायसवाल के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए?
क्या पार्टियों के भीतर महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए?

Taza Khabar