इटावा29नवम्बर*शिक्षा के गिरते स्तर पर कभी ध्यान ही नहीं दिया जा रहा..!!*
*हम शिक्षा को कैसे सर्वसुलभ बना सकते इस पर ध्यान देने की जरूरत..!*
हमारे देश में लोकतंत्र है जहां प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि सरकार उसकी मदद करे! वह इसलिए क्योंकि हम विकसित नहीं हो सके! क्योंकि विकास का पैमाना ही शिक्षा है!सच में हमारी शिक्षा व्यवस्था उस तरह की बनाई ही नहीं की गई जिस तरह की जरूरत भारतीय समाज को थी!हम जात पात की राजनीति में उलझे रहे हम उलझे रहे हिंदू-मुसलमान में! हम उलझे रहे तथाकथित गरीबी हटाने में! लेकिन हमने शिक्षा के गिरते स्तर पर कभी ध्यान ही नहीं दिया! लेकिन क्या हम इस बात का ही रोना रोते रहें कि आजादी के बाद से ही इसपर ध्यान नहीं दिया गया? क्या हम लकीर पीटते रहें कि पूर्ववर्ती सरकारों के कारण ही शिक्षा का स्तर गिरता रहा?प्रश्न यह है कि हमने या यूं कहिए कि हमारी सरकार ने उसमें सुधार के लिए क्या किया! देश की शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए शिक्षा के लिए पलायन करने वाले छात्रों को रोकने के लिए क्या किया? प्रश्न बहुत हैं लेकिन इन प्रश्नों से समस्या का समाधान नहीं होने वाला है! इसी प्रक्रिया में अपने देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षा स्तर के समझने के लिए प्रयास किया!
किसी भी देश का भविष्य उस देश के युवाओं पर निर्भर करता है ऐसे में अगर आज की पीढ़ी शिक्षा से वंचित रहती है तो इसका नुकसान भविष्य में देश को ही उठाना होगा!
बच्चों को कम उम्र में ही शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई जतन करने पड़ते हैं ऐसे में सरकार को सोचना चाहिए कि हर घर में कितनी सुलभ तरीके से शिक्षा को पहुंचाया जा सकता है! सरकार को इस प्रश्न पर गौर करना ही चाहिए कि हम शिक्षा को कैसे सर्वसुलभ बना सकते हैं ताकि देश का शत—प्रतिशत आमजन उसका लाभ उठा सके क्योंकि यदि अब भी समाज का हर व्यक्ति शिक्षित नहीं होगा तो सच में वह अपने मौलिक अधिकार को कैसे समझ सकेगा।

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