October 9, 2026

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सुल्तानपुर 8 अक्टूबर 26*कमला यादव ने थामा आजाद समाज पार्टी का दामन, इसौली में सियासी हलचल*

सुल्तानपुर 8 अक्टूबर 26*कमला यादव ने थामा आजाद समाज पार्टी का दामन, इसौली में सियासी हलचल*

सुल्तानपुर 8 अक्टूबर 26*कमला यादव ने थामा आजाद समाज पार्टी का दामन, इसौली में सियासी हलचल*

सुलतानपुर। इसौली विधानसभा क्षेत्र के मझवारा गांव की रहने वाली कमला यादव ने बुधवार को लखनऊ में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के समक्ष पार्टी की सदस्यता ली। कमला यादव के आजाद समाज पार्टी में शामिल होने की खबर के बाद इसौली विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कमला यादव ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा, “आज लखनऊ की धरती पर माननीय चंद्रशेखर आजाद (रावण) भाई के समक्ष आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थामा। यह सिर्फ सदस्यता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचितों की आवाज को मजबूत करने की दिशा में एक नया संकल्प है। जय भीम!”

कमला यादव दिवंगत कानूनगो रामकुमार यादव की पत्नी हैं। वर्ष 2010 में रामकुमार यादव की हत्या के बाद कमला यादव ने न्याय की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया। पति की हत्या के बाद उनका नाम क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ता रहा है।

कमला यादव की राजनीतिक सक्रियता पहले भी सामने आ चुकी है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के टिकट पर सुलतानपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इसके बाद अब आजाद समाज पार्टी में शामिल होने से उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर एक बार फिर क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है।

इसौली विधानसभा क्षेत्र में आजाद समाज पार्टी की सक्रियता के लिहाज से भी कमला यादव का पार्टी में शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थकों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि उनके पार्टी में शामिल होने का आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों और राजनीतिक समीकरणों से स्पष्ट होगा।

स्थानीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच भी कमला यादव के इस कदम को लेकर चर्चा है। विशेषकर इसौली क्षेत्र में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच उनकी सक्रियता और लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को देखते हुए आजाद समाज पार्टी में उनकी भूमिका पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

Taza Khabar