पूर्णिया8 अक्टूबर 26*गरजा INDIA गठबंधन: सड़कों पर उतरे सैकड़ों कार्यकर्ता, RN साह चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त का फूंका पुतला, इस्तीफे की गूंज
विशेष संवाददाता / ब्यूरो रिपोर्ट (मोहम्मद इरफान कामिल), पूर्णिया डिविजन (बिहार):
पूर्णिया *बिहार की सियासी सरजमीं पर लोकतंत्र की रक्षा को लेकर विपक्षी दलों की तल्खी अपने चरम पर पहुंच गई है। सीमांचल के प्रमुख केंद्र पूर्णिया की सड़कें गुरुवार को उस वक्त नारों से गूंज उठीं, जब INDIA गठबंधन के बैनर तले कांग्रेस, राजद, वाम दलों सहित सभी सहयोगी संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ व्यापक शक्ति प्रदर्शन किया। राज्य समन्वय समिति के आह्वान पर आयोजित इस चरणबद्ध आंदोलन में विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और उनका पुतला दहन किया।
समन्वय समिति के आह्वान पर सड़कों पर उतरा विपक्ष
INDIA गठबंधन समन्वय समिति, बिहार के पत्रांक संख्या IGB/3/26 (दिनांक 5 अक्टूबर 2026) के तहत राज्यव्यापी ‘लोकतंत्र बचाओ अभियान’ का बिगुल फूंका गया था। इसी निर्देश के आलोक में गुरुवार, 8 अक्टूबर को पूर्णिया जिले के कोने-कोने से महागठबंधन के पदाधिकारी, युवा विंग के कार्यकर्ता और प्रमुख नेता एकजुट हुए। आंदोलन का मुख्य मकसद संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर मंडराते खतरे और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच जागरूकता पैदा करना और केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करना था।
इंदिरा गांधी स्टेडियम से निकला विशाल जन-आक्रोश मार्च
आंदोलन की शुरुआत शहर के ऐतिहासिक इंदिरा गांधी स्टेडियम से हुई। दोपहर होते-होते स्टेडियम परिसर में झंडे, बैनर और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। वहां से एक विशाल पैदल प्रतिरोध मार्च निकाला गया। यह मार्च गिरजा चौक, लाइन बाजार और शहर के अन्य प्रमुख व्यावसायिक मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ा।
हाथों में ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’, ‘चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता साबित करे’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारों की तख्तियां लिए कार्यकर्ता कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। इस दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठहर गया। मार्च जैसे ही शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले आर. एन. साह चौक पहुंचा, कार्यकर्ताओं ने चौक को चारों तरफ से घेरकर मुख्य सड़क को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
आर. एन. साह चौक पर पुतला दहन और तीखी नारेबाजी
आर. एन. साह चौक पर प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आक्रोश साफ नजर आया। यहां चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशाल पुतला तैयार किया गया था, जिसे कार्यकर्ताओं ने आग के हवाले कर दिया। आग की लपटों के बीच कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सभा का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष अफरोज आलम ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में संवैधानिक संस्थाओं की ऐसी लाचारी पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने कहा, “आज देश का आम नागरिक और समूचा विपक्ष यह महसूस कर रहा है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम करने के बजाय केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के एक प्रकोष्ठ की तरह व्यवहार कर रहा है। चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। हमारी सीधी मांग है कि जब तक चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश के संविधान और आम आदमी के मताधिकार की रक्षा की लड़ाई है।”
शीर्ष विपक्षी नेताओं पर दमनकारी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं: वैश खान और संजय सिंह
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश महासचिव सह पूर्णिया सांसद प्रतिनिधि वैश खान और प्रदेश महासचिव संजय सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चुनावी तंत्र का दुरुपयोग करके जनादेश को चुराने का प्रयास कर रही है।
नेताओं ने तीखे लहजे में कहा, “नरेंद्र मोदी चुनाव जीतने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर रहे हैं और संवैधानिक आयोगों का खुलेआम राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि आज पूरे देश की आवाम सड़कों पर उतरकर चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांग रही है। जो लोग लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें अमित शाह की पुलिस डंडे और मुकदमों के दम पर दबाने का प्रयास करती है।”
उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए कहा, “संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—के सम्मानित जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे शीर्ष जननेताओं के साथ अपराधियों और असामाजिक तत्वों जैसा सलूक किया जा रहा है। विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने और उनकी आवाज कुचलने की यह साजिश कभी कामयाब नहीं होगी। देश की जनता तानाशाही रवैये को देख रही है और आने वाले समय में नरेंद्र मोदी की सरकार को इसका करारा जवाब देगी।”
सड़क से संसद तक तेज होगा संघर्ष: सांसद प्रतिनिधि
सांसद प्रतिनिधि बबलू भगत और सांसद प्रवक्ता राजेश यादव ने संयुक्त रूप से कहा कि लोकतंत्र में जनता की शंकाओं का समाधान करना सरकार और संवैधानिक संस्थाओं का पहला कर्तव्य होता है। उन्होंने कहा, “ईवीएम, मतदाता सूची और चुनाव संचालन को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों पर चुनाव आयोग पूरी तरह मौन साध लेता है। पारदर्शी चुनाव प्रणाली लोकतंत्र की बुनियाद है। अगर इस बुनियाद को कमजोर करने की कोशिश होगी, तो INDIA गठबंधन खामोश नहीं बैठेगा। यह पुतला दहन महज एक शुरुआत है। महागठबंधन इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद के पटल तक पूरी ताकत के साथ उठाएगा।”
महागठबंधन के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा
इस विरोध प्रदर्शन में महागठबंधन के सभी घटक दलों की मजबूत एकजुटता देखने को मिली। प्रदर्शन में प्रमुख रूप से:
- कांग्रेस नगर अध्यक्ष कुमार आदित्य
- बनमनखी के पूर्व विधायक देवनारायण रजक
- राजद महानगर अध्यक्ष सबि अहमद
- आलोक यादव
- युवा राजद अध्यक्ष नवीन यादव
- भाकपा (CPI) के मोहम्मद इस्लामुद्दीन
- शंकर सहनी
- मोहम्मद जहांगीर
- मनोज यादव
- मोहम्मद मुमताज
- अरुण यादव
- मोहम्मद शफिक आलम
- विक्रम पासवान
- करन यादव
- मोहम्मद वसी
- सयुब आलम
- अमित मंडल
- सोनू यादव
- गोपाल सिंह
- मोहम्मद तनवीर
- शंकर
- संगम
- इंजीनियर सुनील यादव
- दीपक बारा
- मोहम्मद मसी
सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक अंत तक डटे रहे। प्रदर्शन के मद्देनजर चौक-चौराहों पर भारी संख्या में स्थानीय पुलिस बल की तैनाती की गई थी। सभा की समाप्ति पर नेताओं ने संकल्प लिया कि जब तक चुनाव प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता और संस्थागत निष्पक्षता बहाल नहीं हो जाती, तब तक उनका यह आंदोलन पूरे सीमांचल में गांव-गांव तक जारी रहेगा।
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