*आखिर आरोपी एएनएम पर कार्यवाही से क्यों कतरा रहा अस्पताल प्रशासन?*
औरैया 12 नवंबर *शहर के 50 शैय्या अस्पताल में अमरबेल की तरह फैला भ्रष्टाचार, अधिकारी एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी*
*क्या संवेदना शून्य हो गये हैं जिला अस्पताल के अधिकारीगण*
*औरैया।* अपराध एवं भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दम्भ भरने वाली योगी सरकार के मंसूबों पर अधिकारी और कर्मचारी किस तरह बेपरवाह होकर पानी फेर रहे हैं। इसका उदाहरण शहर का 50 शैय्या युक्त जिला संयुक्त चिकित्सालय माना जाये तो गलत न होगा। पिछले दो हफ्तों के अंदर जिस तरह से यहां एक साधारण महिला कर्मचारी अपने अधीक्षक व अन्य उच्च स्तरीय अधिकारियों पर भारी पड़ती दिख रही है और जिम्मेदार अधिकारी उसके प्रति जिस तरह बचाव व पल्ला झाड़ने जैसा व्यवहार अपनाये हुए है। उससे स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि भ्रष्टाचार किस तरह हाबी है। महिला कर्मचारी पर पहले प्रसब कराने के लिए 5 हजार रुपये की मांग की जाती है। रुपये न मिलने पर पति व प्रसूता को भगा दिया जाता है। जब प्रसूता का बाहर सड़क पर तड़पने का वीडियो वायरल होता है, तो अचानक से सीएमएस की दिखावटी संवेदनायें जागृत होती है और वह बाहर से दोबारा उसे अस्पताल में भर्ती कराते है। लेकिन नाक बचाने के चक्कर में शाम को भर्ती कराई गई नाजुक हालत महिला को देर रात तब तक रिफर नहीं करते जब तक उसकी जान पर न बन आन पड़ी।
इन सभी पहलुओं ने जहां जच्चा बच्चा की जान तो ले ही ली लेकिन दूसरा एक खास पहलु तब सामने निकलकर आया जब आरोपी महिला कर्मचारी पर दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। इतना ही नहीं अपने अधीनस्त कर्मचारी को बचाने के चक्कर में जहां गोल मटोल बातें करते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की तो वही उल्टा पीड़ित पर ही नशे में होने क आरोप जड़ दिया। मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ठीक दो दिन बाद इसी आरोपी महिला कर्मचारी द्वारा शहर के मोहल्ला बनारसीदास निवासी एक शिक्षक को बहुत अधिक बीमार बताकर अपने निजी क्लीनिक बुलाया। यह वीडियो भी वायरल हुआ, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सकते मंे आये लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ पत्थर पर लकीर पीटते नजर आये। हद तो तब हो गई जब दो दिन के अन्दर ही दो संवेदनशील मामले वायरल होने व उन पर जांच बैठने के बाद भी इसी आरोपी एएनएम पर पांचवे दिन टीकाकरण के नाम पर एक महिला से 300 रुपये लेने का आरोप लगा और रुपये लेने की बात स्वीकार करने का वीडियो वायरल हो गया। अब क्यों न समझा जाये कि लगातार एक के बाद एक मामले उजागर होने के बाद भी सीएमओ और सीएमएस का संरक्षण आरोपी एएनएम को प्राप्त है। सूत्र बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग का तो यह कहना है कि वायरल वीडियो में रुपये लेने की बात स्वीकारने का तथ्य सामने आया है न कि रुपये लेते हुए दिखाये जाने का। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि आरोपी महिला कर्मचारी सीएमएस व सीएमओ की मिली भगत के चलते अभी तक कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है। जिसके चलते ही संयुक्त चिकित्सालय के सभी कर्मचारी और वरिष्ठ चिकित्सक भी आरोपी महिला कर्मचारी से कतराते हैं। अब यदि यह समझा जाये कि संयुक्त चिकित्सालय भ्रष्टाचार पूरी तरह पनपकर अमर बेल की तरह फैल गया है तो अतिश्योक्ति नहीं है।पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है।
*क्या बोले जिम्मेदार*
इस संबंध में दूरभाष के माध्यम से जब सीएमओ अर्चना श्रीवास्तव से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि उन्होंने सीएमएस को सीडी बना कर दी है। प्रार्थना पत्र भी दिया है तथा वीडियो बयान भी उपलब्ध करा दिया है। कार्यवाही तो करनी ही पड़ेगी। सीएमओ श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने कार्रवाई किए जाने के लिए सीएमएस राजेश मोहन गुप्ता को पत्र जारी किया है। लेकिन विडंबना है की सीएमओ एवं सीएमएस कार्रवाई करने से बच रहे है। इसके अलावा कार्रवाई के मामले को चकरघिन्नी की तरह घुमा रहे हैं। जिससे प्रतीत होता है कि कार्रवाई को ग्रहण लग चुका है। लंबे समय से विवादों से घिरी रही एएनएम पर कार्रवाई के लिए पीड़ित व जनता के लोग अस्पताल प्रशासन पर आंखें गड़ाए हुए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों पर सवालिया निशान भी खड़े कर रहे हैं। देखना है कि आखिर आरोपी एएनएम पर कार्रवाई करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कब कदम उठाएंगे? अस्पताल के कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि यदि इस जगह पर कोई अन्य स्टाफ का व्यक्ति होता तो अब तक जाने कबकी कार्रवाई हो चुकी होती। जानबूझकर मामले को लटकाया जा रहा है। इसके पीछे का क्या राज है समझना होगा?

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