मुजफ्फरनगर 6 अक्टूबर 26*लिखित समझौतों के बावजूद वर्षों से लंबित मांगें, एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने दी हड़ताल की चेतावनी,,,
लोकेन्द्र गौतम ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल यूपीआजतक
मुजफ्फरनगर *7 अक्टूबर तक ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार
मुजफ्फरनगर, 6 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (रजि.) की मुजफ्फरनगर शाखा की ओर से मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर वर्षों से लंबित मांगों के समाधान की मांग उठाई गई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और अधिकारियों के साथ पूर्व में कई बार लिखित समझौते होने के बावजूद उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि 7 अक्टूबर तक मांगों के संबंध में ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो 8 अक्टूबर से प्रदेशभर के एनएचएम संविदा कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगों पर पूर्व में सरकार एवं अधिकारियों के साथ सहमति बन चुकी है और लिखित समझौते भी हुए हैं, लेकिन वर्षों बाद भी उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में 15 दिन की अनवरत हड़ताल और 10 दिन की भूख हड़ताल के बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के साथ लिखित समझौता हुआ था। इसमें नियमित भर्तियों में एनएचएम स्वास्थ्य कर्मचारियों को अतिरिक्त अंक दिए जाने की मांग प्रमुख थी। कर्मचारियों को बताया गया था कि प्रक्रिया लगभग दो माह में पूरी कर ली जाएगी, लेकिन करीब दस वर्ष बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
डॉ. सचिन जैन ने कहा कि लंबे समय तक मांग लंबित रहने के कारण उस समय कार्यरत अनेक कर्मचारी अब निर्धारित आयु सीमा से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में यदि अब भी निर्णय होता है तो उन्हें इसका वास्तविक लाभ मिल पाना कठिन होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के समझौते में अन्य प्रदेशों में एनएचएम कर्मचारियों को मिल रही सुविधाओं के अनुरूप उत्तर प्रदेश में भी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन इस दिशा में भी कर्मचारियों की समस्याएं बनी हुई हैं।
डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि वर्ष 2021 के आंदोलन के बाद भी सरकार और अधिकारियों के साथ लिखित समझौता हुआ था। इसमें प्रत्येक तीन वर्ष पर 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस तथा प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत इंक्रीमेंट दिए जाने की बात कही गई थी। कर्मचारियों का आरोप है कि समझौते के बाद भी इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
महामंत्री मणिकांत त्यागी ने कहा कि बार-बार समझौते और आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। संगठन सरकार से टकराव नहीं चाहता, बल्कि पूर्व में किए गए लिखित समझौतों के सम्मान और उनके क्रियान्वयन की मांग कर रहा है।
डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल ठोस कदम नहीं उठाया तो 8 अक्टूबर से प्रदेश के एक लाख से अधिक एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। संगठन का कहना है कि हड़ताल की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
कोषाध्यक्ष डॉ. फैसल सिद्दीकी ने बताया कि पिछले करीब 15 दिनों से एनएचएम संविदा कर्मचारी विभिन्न मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाने तथा उनके समाधान में सहयोग का अनुरोध कर रहे हैं।
जिला महिला चिकित्सालय के संजय कुमार ने बताया कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक एवं उदारतापूर्वक विचार करने का आग्रह किया गया है।
वहीं डॉ. शमशेर ने बताया कि एनएचएम संविदा कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी मिला था। उनके अनुसार डॉ. बालियान ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से फोन पर वार्ता कर मांगों के समाधान में सहयोग का आग्रह किया।
जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने दोहराया कि संगठन सरकार के साथ टकराव नहीं चाहता। कर्मचारियों की मुख्य मांग पूर्व में किए गए लिखित समझौतों को लागू कराने और इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कराने की है। उन्होंने कहा कि यदि 7 अक्टूबर तक सरकार की ओर से कोई ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं आता है तो 8 अक्टूबर से प्रस्तावित हड़ताल को टालना मुश्किल होगा।
स्टाफ नर्स डिंपल रानी ने कहा कि कर्मचारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार बनने से पहले लखनऊ में आयोजित एक रैली में तत्कालीन राष्ट्रीय स्तर के नेता और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिए जाने की बात कही जाती रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के करीब दस वर्ष के कार्यकाल के बावजूद कर्मचारियों की प्रमुख समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सीएमओ कार्यालय में कार्यरत रवि कुमार ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगों और बार-बार हुए लिखित समझौतों के बावजूद कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में निराशा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को स्पष्ट लिखित आदेश जारी करने चाहिए, ताकि वे पूरी निष्ठा और मनोयोग से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. सचिन जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. फैसल सिद्दीकी, डॉ. सुदेश वर्मा, डॉ. शमशेर, स्टाफ नर्स डिंपल रानी, डाटा ऑपरेटर संजय कुमार, रवि कुमार, डाइटिशियन नेहा त्यागी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं एनएचएम संविदा कर्मचारी मौजूद रहे। संगठन ने सरकार से मांग की है कि 7 अक्टूबर तक लंबित मांगों और पूर्व में हुए लिखित समझौतों के संबंध में ठोस एवं लिखित निर्णय लिया जाए, ताकि प्रस्तावित हड़ताल को टाला जा सके और प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित प्रभाव से बचा जा सके।
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