October 2, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

मथुरा2अक्टूबर26* रोडवेज फोरमैन की तानाशाही ‘पैसा दो तो ठीक, नहीं तो खराब बस लेकर जाओ’

मथुरा2अक्टूबर26* रोडवेज फोरमैन की तानाशाही ‘पैसा दो तो ठीक, नहीं तो खराब बस लेकर जाओ’

मथुरा 2 अक्टूबर 26 रोडवेज फोरमैन की तानाशाही ‘पैसा दो तो ठीक, नहीं तो खराब बस लेकर जाओ’

मथुरा रोडवेज के डिपो वर्कशॉप में फोरमैन और अधीनस्थ कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप, रात में महत्वपूर्ण पार्ट्स गायब होने की भी चर्चा

कु0 सोनम यूपीआजतक 

मथुरा। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मथुरा डिपो की कार्यशाला में बसों की मरम्मत व्यवस्था अंतर्गत रोडवेज फोरमैन की तानाशाही को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्कशॉप में बसों की खराबी की शिकायत के बावजूद कई बसों को दुरुस्त किए बिना रूट पर यात्रियों की जान की परवाह किए बिना रुट भेज दिया जाता है। वहीं, फोरमैन की कथित मिलीभगत से रात्रि पाली में खड़ी बसों से बैटरी, लीड, साइड शीशे और टायर जैसे महत्वपूर्ण पार्ट्स निकाले जाने और उन्हें अन्य बसों में लगाए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि रात्रि पाली में खड़ी बसों से निकाले गए कुछ पार्ट्स को कथित तौर पर अपने चहेते चालक-परिचालकों की बसों में लगाया जाता है। आरोप यह भी है कि इसके लिए बस के रूट या उसकी दूरी तक का ध्यान नहीं रखा जाता। महत्वपूर्ण रूट पर चलने वाली बस हो या लंबी दूरी की, यदि किसी बस से पार्ट निकाला जाता है तो कथित तौर पर उसे दूसरी बस में लगा दिया जाता है।

चालकों की ओर से वर्कशॉप में मरम्मत व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। सूत्रों का दावा है कि जिन चालकों की बसों में खराबी आती है, उनमें कथित रूप से पैसे देने वालों की बसों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि अन्य बसों की शिकायतें लंबित रहती हैं। चालक खराब बस लेकर रूट पर जाने को मजबूर होते हैं।

चालकों का कहना है कि बस रूट पर नहीं ले जाने पर ड्यूटी और नौकरी को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है। परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे जोखिम उठाकर बस लेकर निकलते हैं। रास्ते में बस खराब होने पर यात्रियों की नाराजगी भी चालक-परिचालक को ही झेलनी पड़ती है।

 

रात्रि पाली में बसों से महत्वपूर्ण पार्ट्स के कथित रूप से निकाले जाने की जानकारी ने वर्कशॉप की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैटरी, टायर और शीशे जैसे पार्ट्स बस के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि रात्रि पाली में बसों की निगरानी कौन करता है, पार्ट्स निकलने और दूसरी बस में लगाए जाने का रिकॉर्ड कहां दर्ज होता है और संबंधित अधिकारी इसकी जांच कैसे करते हैं।

मथुरा डिपो की कार्यशाला का उच्च अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण किया जाए तो कई शिकायतों की वास्तविकता सामने आ सकती है। बसों के पार्ट्स का स्टॉक, खराब पार्ट्स का रिकॉर्ड, रात्रि पाली में बसों की स्थिति, मरम्मत रजिस्टर और बसों में लगाए गए पार्ट्स का मिलान कराया जाए। साथ ही, चालकों की शिकायतों और वर्कशॉप में उनके निस्तारण की भी जांच की जाए।

निगम हित में जरूरी है कि वर्कशॉप की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

Taza Khabar