गोरखपुर4अगस्त26*शीर्षक: जाने कौन हैं श्याम नारायण सिंह – निस्वार्थ सेवा से बढ़ रही लोकप्रियता*
*जिला अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ, गोरखपुर*
गोरखपुर। माध्यमिक शिक्षक संघ, गोरखपुर के जिला अध्यक्ष *श्याम नारायण सिंह भैया* आज शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी वर्ग में अपनी निस्वार्थ सेवा के लिए विशेष पहचान बना चुके हैं।
*उनकी कार्यशैली की खासियत:*
श्याम नारायण सिंह भैया की सबसे बड़ी खासियत है कि वे हर मामले का पहले पूरी तरह परीक्षण करते हैं और फिर अपनी क्षमता के अनुरूप निस्वार्थ भाव से मदद करते हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के हर पीड़ित शिक्षक-कर्मचारी के साथ खड़े रहते हैं।
*कुछ प्रमुख उदाहरण:*
1. *बालापार का मामला*: मृतक आश्रित के नियुक्ति प्रकरण में उन्होंने परिवार को हर संभव कानूनी और प्रशासनिक मदद उपलब्ध कराई।
2. *शिव चंद भैया का सहयोग*: उनके सहयोग में भी श्याम नारायण भैया ने अग्रणी भूमिका निभाई।
जिला स्तर के कई कर्मचारी और अधिकारी जब किसी मुसीबत में फंसते हैं तो वे पहले मामले को समझते हैं और सही पाए जाने पर पूरा सहयोग करते हैं।
*शिक्षकों के हितों के लिए समर्पण:*
शिक्षकों की वेतन, पदोन्नति, पेंशन, स्थानांतरण जैसी हर समस्या पर वे निशुल्क और निस्वार्थ मदद करते हैं। इसी कारण शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारियों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है।
*चुनौतियां भी हैं:*
कहते हैं “जहां फूल होते हैं वहां कांटे भी होते हैं”। श्याम नारायण सिंह भैया की बढ़ती लोकप्रियता और अच्छे कार्यों से कुछ विरोधी भी परेशान हैं। वे हर मौके पर शब्दों के बाण छोड़कर और बदनाम करने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन भैया अपने सेवा व्रत से कभी विचलित नहीं होते।
शिक्षक समाज को ऐसे नेतृत्व पर गर्व है जो “पहले समाज, फिर स्वार्थ” के सिद्धांत पर चलता है।
राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा
गोरखपुर
श्याम नारायण सिंह भैया बहुत शांति के साथ कार्य करते हैं । अपने कार्य की सफलता से विरोधियों की जवाब देते हैं। *विरोधियों का जवाब काम से*या यह भी कह सकते हैं वो बदनाम करेंगे। हम काम करके जवाब देंगे।
श्याम नारायण भैया जैसे लोग कम हैं। पद कोई भी हो, नियत साफ हो तो लोग अपने आप साथ आ जाते हैं।

More Stories
लखनऊ4अगस्त26*यूपीआजतक न्यूज चैनल पर दोपहर 1 बजे की बड़ी खबरें……………….*
बलिया4अगस्त26* बलिया: में वफादार कुत्ते ने मालिक को सांप से बचाया, खुद गंवाई जान।
प्रतापगढ़4अगस्त26*प्रतापपुर कमैंचा: टूटे खड़ंजे पर प्रधान-सचिव मौन, ग्रामीण 1 साल से लगा रहे गुहार*