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भागलपुर बिहार से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता
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भागलपुर28अप्रैल26*मजदूर दिवस पर लेबर कोड के विरोध में निकाला जाएगा मार्च*
*भुखमरी की मज़दूरी और मज़दूरी की चोरी के खिलाफ़ उठेगी आवाज*
28 अप्रैल 2026, भागलपुर
कॉर्पोरेट परस्त लेबर कोड के विरोध में मंगलवार को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के नेतृत्वकारियों की संयुक्त बैठक स्थानीय कचहरी परिसर में हुई। बैठक में केंद्र की विनाशकारी मोदी शासन में मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमले के खिलाफ आन्दोलन तेज करने पर जोर दिया गया और मई दिवस के मुद्दों पर विमर्श कर कार्यक्रम की संयुक्त योजना बनायी गयी। ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा व सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद आदि बैठक में शामिल हुए।
बैठक में तय किया गया कि इस बार अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मोदी के कॉर्पोरेट परस्त लेबर कोड्स को रद्द करने, मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी 1500/- रुपए प्रतिदिन या 42000/- रुपये मासिक घोषित करने, 12 घंटे काम करने की व्यवस्था को बंद करने और 8 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम काम के लिए दोगुनी मजदूरी की गारंटी करने, और कॉन्ट्रैक्ट, मानदेय, डेली वेज, अप्रेंटिसशिप, ट्रेनी, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट का सिस्टम खत्म करने व इस तरह के सभी मजदूरों को परमानेंट करने आदि मुद्दों पर केंद्रित होगा। इन्हीं मुद्दों – मांगों पर उठाते हुए 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा संयुक्त मार्च निकला जाएगा। मार्च की शुरुआत स्थानीय घंटाघर चौक से होगी जो खलीफाबाग, मुख्यबाजार के रास्ते स्टेशन चौक तक जाएगी।
बैठक को सम्बोधित करते हुए मजदूर संगठनों के नेतृत्वकारियों ने कहा कि मोदी सरकार ने सपना देखा था कि अगर मज़दूर विरोधी, कारपोरेट परस्त चार कोड लागू कर दिए जाएं तो मज़दूरों के संघर्ष और ट्रेड यूनियन खत्म हो सकते हैं। 1 अप्रैल से लेबर कोड लागू करने पर हस्ताक्षर कर मोदी सरकार ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। एक बाद एक, पूरा उत्तर भारत मजदूर आंदोलन की चपेट में है। मज़दूर लेबर कोड के अलग-अलग क्रूर पहलुओं के खिलाफ़, जाने-अनजाने उठ खड़े हुए है। लगातार बढ़ता यह आंदोलन पूंजी द्वारा क्रूर शोषण की व्यवस्था के खिलाफ़, भुखमरी की मज़दूरी और मज़दूरी की चोरी के खिलाफ़, 12 घंटे या उससे ज्यादा काम करवाने के खिलाफ़ और 8 घंटे से ज्यादा ओवरटाइम काम के लिए डबल पेमेंट की मांग के लिए मज़दूरों के गुस्से का सिलसिला है। यही मजदूर विरोधी लेबर कोड कानून मोदी सरकार की कब्र खोद देगा। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस से 1 मई को मजदूर संगठन सरकार विरोधी अभियान की शुरुआत करेगा।

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