April 20, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

Bhahalpur 20 Aprail 2026*पुराने रोस्टर के सहारे चल रहा नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, डॉक्टर नदारद, गायनो सेवा बदहाल — भ्रष्टाचार के आरोप तेज नवगछिया।

Bhahalpur 20 Aprail 2026*पुराने रोस्टर के सहारे चल रहा नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, डॉक्टर नदारद, गायनो सेवा बदहाल — भ्रष्टाचार के आरोप तेज नवगछिया।

Bhahalpur 20 Aprail 2026*पुराने रोस्टर के सहारे चल रहा नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, डॉक्टर नदारद, गायनो सेवा बदहाल — भ्रष्टाचार के आरोप तेज

नवगछिया। अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। हैरानी की बात यह है कि 7 जुलाई 2025 को तैयार किया गया ड्यूटी रोस्टर अब तक 19 अप्रैल 2026 तक लागू बताया जा रहा है। इतने लंबे समय तक रोस्टर में कोई बदलाव नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की उदासीनता को उजागर करता है। इससे अस्पताल संचालन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अस्पताल में कागजों पर करीब 20 से 21 चिकित्सकों की पदस्थापना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। रोजाना महज 4 से 5 डॉक्टर ही ड्यूटी पर नजर आते हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ चिकित्सक महीने में एक-दो दिन ही ड्यूटी करते हैं और पूरे महीने की हाजिरी बनाकर वेतन उठा लेते हैं। इसको लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और अस्पताल में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की चर्चा तेज हो गई है।

महिला स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के बावजूद ड्यूटी के दौरान केवल एक ही डॉक्टर दिखाई देते हैं। रात्रि के समय उनकी अनुपस्थिति की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रसव और अन्य जटिल मामलों में महिला मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।

रात के समय अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी जीएनएम और ममता कर्मियों के भरोसे रह जाती है। सीमित संसाधनों के बीच ये कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तो कर रहे हैं, लेकिन बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के गंभीर मामलों को संभालना उनके लिए भी कठिन चुनौती बना हुआ है। इससे मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर तैनात हैं, तो वे ड्यूटी पर क्यों नहीं दिखते। आखिर किसके संरक्षण में यह व्यवस्था चल रही है, जहां अनुपस्थित चिकित्सकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। अस्पताल प्रशासन की चुप्पी भी पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।

स्थिति यह है कि मजबूरी में मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सरकारी अस्पताल की इस लापरवाही से आम लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ड्यूटी रोस्टर को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए तथा चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

Taza Khabar