प्रयागराज ९फरवरी 26 प्रयागराज निवासी प्रोफेसर से 1 करोड़ 11 लाख कि ठगी••••!
कोटद्वार में प्रोफेसर से ₹1.11 करोड़ की साइबर ठगी:डिजिटल अरेस्ट में रखकर सीबीआई-सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाया, एफडी तुड़वाकर लाखों ट्रांसफर कराए••••!
कोटद्वार के राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की एक वरिष्ठ प्राध्यापिका से 1 करोड़ 11 लाख 90 हजार रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मामले में कोटद्वार कोतवाली पुलिस ने रविवार रात मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि जिले की साइबर टीम ने भी जांच शुरू कर दी है!
पीड़ित प्रोफेसर को ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, पुलिस, सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा अधिकारी बताकर लगातार 12 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। इस दौरान उन्हें क्वारंटीन रहने, किसी से बात न करने और बैंक खातों की पूरी जानकारी देने को मजबूर किया गया!
हैरानी की बात यह है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी सोमवार को साइबर ठग लगातार प्रोफेसर को फोन करते रहे, जिसकी सूचना भी उन्होंने पुलिस को दी!
पीड़ित प्रोफेसर ने तहरीर में बताया कि 8 दिसंबर को उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम डिपार्टमेंट, बेंगलुरु का कर्मचारी बताया!
उसने कहा कि उनके मोबाइल नंबर से 17 युवतियों को आपत्तिजनक मैसेज भेजे गए हैं, जिनमें से एक युवती ने आत्महत्या का प्रयास किया है। इसके बाद उन्हें बेंगलुरु के इंदिरानगर पुलिस स्टेशन बुलाया गया!
जब प्रोफेसर ने खुद को सीनियर सिटीजन बताते हुए बेंगलुरु जाने में असमर्थता जताई, तो कॉल करने वाले ने उन्हें एक अन्य व्यक्ति से जोड़ा, जिसने खुद को इंस्पेक्टर बताया!
उसने करीब 40 मिनट तक पूछताछ की और प्रोफेसर को ‘क्वारंटीन’ रहने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्हें किसी से संपर्क न करने को कहा गया!
15 दिसंबर को फिर फोन आया और बताया गया कि उनका नाम ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस के संदिग्धों में है। साथ ही कहा गया कि उनके नाम से मुंबई के कैनरा बैंक में 3 करोड़ रुपए जमा हैं!
इसके बाद 16 दिसंबर को एक महिला का फोन आया, जिसने खुद को सीबीआई से जुड़ा बताया और कहा कि उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है!
महिला कॉलर ने मदद का झांसा देकर प्रोफेसर से उनके बैंक खातों की पूरी जानकारी ली। इसके बाद उन्हें बैंक की एफडी तुड़वाकर एक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया!
पहले उन्होंने 37.50 लाख रुपए ट्रांसफर किए। इसके बाद महिला ने उन्हें प्रयागराज (इलाहाबाद) जाकर खातों के ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर स्टेट बैंक से 30.50 लाख और यूनियन बैंक से 35 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए!
यूनियन बैंक में उनकी बहन के नाम पर मौजूद तीन एफडी भी तुड़वाकर 39 लाख रुपए जमा करवा लिए गए!
इसके बाद ठगों ने प्रोफेसर को एक फर्जी सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट का लिंक भेजा, जिसमें लिखा था कि 64.18 लाख रुपए जमा करने पर अरेस्ट वारंट रद्द होगा!
जब प्रोफेसर ने पैसे न होने की बात कही तो रिश्तेदारों से पैसे मंगाने को कहा गया। उन्होंने अपने भाई से मदद मांगी, लेकिन जब ट्रांजैक्शन नहीं हुआ और पूरी बात भाई को बताई, तब ठगी का खुलासा हुआ!
रविवार शाम प्रोफेसर ने कोटद्वार कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी। पुलिस ने देर रात मुकदमा दर्ज कर लिया है। अपर पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि साइबर टीम मामले की जांच कर रही है और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी!
पुलिस के अनुसार, 8 से 19 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट में रखी गई प्रोफेसर को सोमवार को भी साइबर ठगों के फोन आते रहे। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई है!
पुलिस ने प्रोफेसर को अज्ञात नंबर से आने वाली किसी भी कॉल को रिसीव न करने की सलाह दी है!
21 दिसम्बर को एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी आज 8 फरवरी तक पुलिस कि जांच में कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है, प्रोफेसर अवकाशप्राप्ति के नजदीक हैं और सारी जमा-पूँजी गंवा चुकी हैं!!

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