कानपुर31दिसम्बर*पियूष जैन भाजपाई निकलते ही काला धन अचानक मेहनत की कमाई हो गयी.. अब बारीकीयां समझो..
1.) कल तक पैसा 275 करोड़ पहुँच चुका था जो अब अचानक वापस 177 करोड़ रह गया. बाकी का कहां गया.. पार्टी फंड या घूस में ?
2.) ये पैसा काले धन के बजाय रिवेन्यू यानी कम्पनी की कमाई बता दिया गया.. इसका मतलब है बन्दे ने सिर्फ टैक्स चोरी किया है… जबकि टैक्स चोरी करके इकट्ठे धन को ही तो काला धन कहते हैं.. फिर इसमें बदला क्या ?
3.) नोटबंदी के बाद 25 हज़ार से ऊपर का बिजनेस ट्रांजेक्शन सिर्फ चेक से हो रहा फिर इतनी बढ़ी रकम 2000 के नोटों में इकट्ठी कैसे हुईं ? कोई भी व्यापारी चेक से आये धन को कैश में निकाल कर तो रखेगा नहीं.. फिर ये इकठ्ठा कैसे हुआ ?
4.) सरकार कह रही कि इनकम टैक्स वाले पूछताँछ नहीं कर सकते क्योंकि GST का मामला है। जबकि देश में आय से अधिक संपत्ति या आ से अधिक धन के सारे मामले इनकम टैक्स के अन्तरगत आते हैं फिर इसमें ऐसा क्या अनोखा है जो इससे पूछतांछ नहीं होंगी ?
सीधी बात है.. बंदा भाजपा का फंडर है तो 275 में से 88 करोड़ गया “भाजपा विधायक खरीदो निधि” में, 10 करोड़ जायेगा चैनलों और मीडिया को मुंह बंद रखने के लिए और 177 वाइट में दिखाकर उसमें से भी 52 करोड़ जायेगा सरकारी GST विभाग को पेनल्टी के रुप में .. सरकारी महकमा भी खुश और सरकार भी खुश।
अंधभक्त को लगता था कि नोटबंदी से अमीर परेशान होगा तो लो देख लो.. अमीर पकड़ भी जायेगा तो हिस्सा देकर छूट जायेगा। तुम पकोडे तलो.. #कालचक्र

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