April 21, 2026

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पूर्णिया बिहार26नवंबर25* सर्वाइकल (बच्चेदानी का मुंह)कैंसर के खिलाफ बिहार सरकार और यूनिसेफ़ की संयुक्त मुहिम

पूर्णिया बिहार26नवंबर25* सर्वाइकल (बच्चेदानी का मुंह)कैंसर के खिलाफ बिहार सरकार और यूनिसेफ़ की संयुक्त मुहिम

पूर्णिया बिहार26नवंबर25* सर्वाइकल (बच्चेदानी का मुंह)कैंसर के खिलाफ बिहार सरकार और यूनिसेफ़ की संयुक्त मुहिम

पूर्णियां में मीडिया को बनाया जागरूकता का भागीदार:-

पूर्णिया बिहार से मोहम्मद इरफान कामिल की खास रिपोर्ट यूपी आज तक

पूर्णिया बिहार। ‌ किशोरियों के स्वास्थ्य और सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी का मुंह) जैसे बढ़ते खतरे को देखते हुए यूनिसेफ बिहार और बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को पूर्णिया में प्रमंडल स्तरीय मीडिया वर्कशॉप आयोजित की। वर्कशॉप में पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज के पत्रकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मकसद स्वास्थ्य रिपोर्टिंग को मजबूत बनाना और HPV वैक्सीन एवं सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी का मुंह) स्क्रीनिंग से जुड़ी सही जानकारी मीडिया तक पहुँचाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए रीजनल एडिशनल डायरेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार डॉ. पी.के. कन्नौजिया ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जबकि यह बीमारी पूरी तरह रोकथाम योग्य है। उन्होंने कहा, “टीकाकरण और समय पर जांच ही इसका सबसे प्रभावी समाधान है। मीडिया इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।”
यूनिसेफ बिहार की संचार विशेषज्ञ डॉ. पूजा ने कहा कि पोलियो और कोविड जैसी बड़ी स्वास्थ्य मुहिमों में बिहार के पत्रकारों ने जिम्मेदारी के साथ काम किया है।
उन्होंने कहा, “HPV वैक्सीन किशोरियों को जीवनभर सुरक्षा दे सकती है। लेकिन परिवार सही निर्णय तभी ले पाएंगे, जब जानकारी स्पष्ट, भरोसेमंद और वैज्ञानिक आधार पर हो—यहीं, मीडिया का नेतृत्व फिर से जरूरी हो जाता है।”
तकनीकी सत्र में यूनिसेफ के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.अंशुमन ने समझाया कि सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (सर्विक्स) में होता है और इसके लगभग सभी मामले HPV वायरस से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि साल 2022 में देश में 79,103 नए मामले और 34,805 मौतें दर्ज हुईं, जबकि नियमित स्क्रीनिंग द्वारा बीमारी का समय पर पहचान किया जा सके। ये एक ऐसा कैंसर है जिसे वैक्सिन द्वारा रोका जा सकता है।
वर्कशॉप में पूर्व संपादक (नवभारत टाइम्स) श्री मधुरेश सिन्हा और यूनिसेफ के स्टेट CAP कंसल्टेंट शादाब मलिक ने पत्रकारों को Critical Appraisal Skills (CAS) एवं Media Reporting Toolkit (MRT) के बारे में बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्टिंग में- तथ्यों की ठोस जांच, विश्वसनीय स्रोतों का उल्लेख,, मिथकों का खंडन, और आसान भाषा बहुत जरूरी है, ताकि जनता भ्रमित न हो।
कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि HPV वैक्सीन, किशोर स्वास्थ्य, और महिलाओं की स्क्रीनिंग को लेकर समाज में कई तरह की झिझक और गलतफहमियाँ हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि माता-पिता, शिक्षक और समुदाय एवं मीडिया के सहयोग से ही इन मिथकों को तोड़ा जा सकता है।
वर्कशॉप के अंत में पत्रकारों ने समूह गतिविधियों में भाग लिया एवं स्थानीय रिपोर्टिंग के लिए स्टोरी आइडिया और योजनाएँ तैयार कीं।
कार्यक्रम का समापन एनएचएम बिहार के रीजनल प्रोग्राम मैनेजर मोहम्मद कैसर इक़बाल के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

Taza Khabar