बाँदा27मार्च25*पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार प्रदीप जैन आदित्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि–
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
स्थान– मवई सर्किट हाउस बांदा(उप्र), दिनांक 27 मार्च 2025,
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कुशासन के 8 साल पूरे हो गये हैं। प्रदेश बदहाल है, जनता बेहाल है और सरकार अपनी आत्ममुग्धता में खुद ही अपनी पीठ थपथपा रही है। आकड़ों की बाजीगरी कर योगी जी सच को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। मगर प्रदेश में व्याप्त अराजकता, कुशासन, जंगलराज उनके हर झूठ को बेनकाब कर रहा है। हम इस योगी सरकार से 8 सवाल पूछते हैं जिनके जवाब प्रदेश की जनता जानना चाहती है।
1- योगी जी क्यों है प्रदेश के युवाओं का भविष्य अंधकारमय?
पिछले 8 सालों में लगभग सरकारी परीक्षाओं के पर्चे लीक हुए हैं। कई ऐसी परीक्षाएं हुई है जिनके परिणाम आज तक सरकार घोषित नहीं कर पाई है। पिछले कई सालों से यह सरकार नई शिक्षक भर्ती भी नहीं कर पाई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पूरी तरह से निरंकुश हो चुकी है। कुल मिलाकर यह सरकार प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरी देना ही नहीं चाहती है। निजी क्षेत्र में नये निवेश ना होने के कारण युवाओं के लिए नौकरियां नहीं मिल पा रही है। ILO (इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन) के अनुसार उ0प्र0 में सबसे अधिक युवा बेरोजगार हैं।
2- मुख्यमंत्री जी यह बताएं कि उनके शासन में किसान/मजदूर क्यों बदहाल है?
07 दिसंबर 2024 से नरेगा मजदूरों की 100 करोड़ से अधिक की मजदूरी बकाया है। होली बीत गई और ईद आने वाली है और इस संवेदनहीन सरकार में मजदूरों को कोई भी त्यौहार मनाने का हक नहीं है। यह आम बात है कि प्रदेश में मजदूरी समय से नहीं मिलती है और अक्सर मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच जाते हैं। उन्होंने किसानों की आय तो दोगुनी नहीं हुई, मगर उनकी लागत जरूर बढ़ गई जिससे वह जितना कमा रहे थे अब उतना भी नहीं कमा रहे हैं। अक्टूबर 2024 में डीएपी की कालाबाजारी हुई और बाजार से अधिक पैसे देने पर भी डीएपी नहीं मिल रहा था। फ्री बिजली माफ की योजना में इतने अगर लगे हुए हैं कि शायद ही कोई किसान अपनी बिजली का बिल माफ करा पाता हो। गन्ना समर्थन मूल्य पिछले आठ सालों में मात्र तीन बार बढ़ा और वह कुल 55 रूपये जबकि महंगाई कहां से कहां पहुंच गई।
3- भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा करने वाले योगी जी यह बताएं कि उ०प्र० भ्रष्टाचार युक्त कैसे हो गया?
मुख्यमंत्री जी के ड्रीम प्रोजेक्ट इन्वेस्ट यूपी के कर्णधार आईएएस अभिषेक प्रकाश कमिशनखोरी में पकड़े गये। सच यह है कि पूरे प्रदेश का कोई ऐसा विभाग नहीं जहां बिना घूसखोरी/कमिशनखोरी के काम हो रहा हो। कुम्भ से कोरोना तक, रामपथ से ईन्वेस्ट यूपी तक चारों ओर भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है। आएदिन सोशल मीडिया पर धंसती हुई सड़कों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, इंसान तो इंसान इनकी सरकार ने प्रभु श्री राम से बेइमानी करने से नहीं चूके। रामपथ इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। हाल में आयोजित हुए कुंभ की बदहाली ने बहुत ही व्यापक स्तर पर हुए घोटाले का संकेत दिया। कोरोना की भयावह महामारी में जब हर तरफ लाशों का ढेर था तब भी इस सरकार ने थर्मामीटर से लेकर ऑक्सीमीटर तक, दवाओं से लेकर ऑक्सीजन सिलेंडर तक में जबरदस्त भ्रष्टाचार किया।
4- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से पूरे प्रदेश की तरफ से यह सवाल है कि क्यों इस प्रदेश में सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का एक राज्य प्रायोजित अभियान चल रहा है।
बहराइच में दंगों के समय प्रशासन और पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। संम्भल का मामला हो या कुशीनगर में बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किये मस्जिद को गिरा देने का मामला रहा हो या फिर मथुरा में विवाद पैदा करने का मामला रहा हो। यह सरकार सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर वोट की राजनीति करना चाहती है।
5- जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले योगी जी को यह बताना होगा कि कैसे यह प्रदेश अपराध प्रदेश में तब्दील हो गया।
योगी जी यह दावा करते हैं कि प्रदेश में अपराध खत्म हो चुके है मगर समाचार पत्रों और चैनलों की ओर नजर जाती है तो प्रत्येक दिन किसी ना किसी जघन्य अपराध की कहानी लिखी होती है। एनसीआरबी के आकड़े कहते हैं कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध में 15 प्रतिशत अकेले उ0प्र0 में हो रहे हैं। आएदिन दुष्कर्म की कोई ना कोई घटना हो रही है जिसके चलते हमारी बहन बेटियों का घर से निकलना दूभर हो गया है। दलितों के खिलाफ अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं। जो सामाजिक अपराध बंद हो चले थे जैसे दलितों की बारात रोंकना, उन पर हमला करना, उन्हें घोड़ी न चढ़ने देना इस सरकार में पुनः होने लगे हैं।
6- योगी जी यह भी बताना होगा कि उनकी सरकार संविधान और आरक्षण विरोधी क्यों है?
69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में मा० उच्च न्यायालय की पहले सिंगल बेंच ने और फिर डबल बेंच ने यह निर्णय दिया कि इन भर्तियों में आरक्षण नियमावली 1994 के नियमों का पालन नहीं किया गया। निर्लज्जता इतनी कि उसके बाद भी इस सरकार ने न्यायालय के आदेश को नहीं माना। स्थाई सरकारी नौकरियों को समाप्त कर यह सरकार ठेके प्रणाली पर पूरे प्रदेश को ले आना चाहती है ताकि वह आरक्षण को समाप्त कर सके। आएदिन योगी जी स्वयं और इनके तमाम मंत्री संविधान विरोधी बयान दिया करते हैं।
7- मेरा मुख्यमंत्री जी से सवाल है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं इतनी बेहाल क्यों हैं।
आयुष्मान योजना में राष्ट्रीय स्वास्थय प्राधिकरण (NHA) की राष्ट्रीय धोखाधडी विरोधी ईकाई (NAFU) की जांच में 139 करोड़ रूपये से अधिक से फर्जी क्लेम उत्तर प्रदेश में पाये गये जो पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं। योगी जी देश का सबसे बड़ा बजट होने का दावा करते हैं मगर स्वास्थ्य विभाग को मात्र 6 प्रतिशत आवंटित करते हैं। नीति आयोग के 19 राज्यों के स्वास्थ्य सेवाओं पर किए एक सर्वे के अनुसार उ०प्र० स्वास्थ्य सेवाओं के मामलों में 18 वें नंबर पर है। 112 एम्बुलेंस सेवाओं के नाम पर जबरदस्त घोटाला हो रहा है।
आए दिन सोशल मीडिया पर इसी व्यवस्था के अभाव में लाश को कंधे पर ले जाते लोग, एम्बुलेंस को धक्का मारते लोग, बेड के आभाव में एक ही बेड पर इलाज कराते दो-दो मरीज दिखते रहते हैं। सिर्फ दिखावे के लिए कई जिला के जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में तब्दील कर दिया गया है मगर उन्हें कोई भी अतिरिक्त सुविधा नहीं दी गई है। हालत यह है कि अस्पतालों में न तो दवाएं है और ना ही कोई परीक्षण हो पाते हैं।
8- योगी जी यह बताएं कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था इतनी बदहाल क्यों है?
योगी जी 8 लाख करोड़ का बजट पेश करते हैं मगर इस बात पर मौन साध लेते हैं कि प्रदेश पर कुल कर्ज 9 लाख करोड़ के आस-पास पहुंचने वाला है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में पूरे देश में हम सिर्फ बिहार से ऊपर हैं। आज भी प्रदेश की 22.5 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करती है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना चल रहा है मगर अभी पिछले बजट का ही मात्र 55 प्रतिशत धनराशि खर्च हो पाई है। PWD और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग तो अपने आवंटित बजट का मात्र 50 प्रतिशत ही खर्च कर पाये हैं। पिछले कई सालों से यह देखने में आ रहा है कि वित्तीय वर्ष के अंत में सरकार 30 से 35 प्रतिशत बजट खर्च ना कर पाने के कारण सरेंडर कर देती है।
जिस बदहाली और जंगलराज की दशा से उत्तर प्रदेश गुजर रहा है उसमें मुख्यमंत्री जी को एक भी दिन अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। हम मांग करते हैं कि उन्हें तत्काल प्रभाव से अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम में बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, चित्रकूट कांग्रेस जिलाध्यक्ष कुशल पटेल, बांदा कांग्रेस शहर अध्यक्ष अफसाना शाह, पूर्व बांदा कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार लालू दुबे एडवोकेट, बांदा बार एसोसिएशन अध्यक्ष द्वारिकेश सिंह यादव मंडेला, बांदा महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सीमा खान, बी लाल, बांदा कांग्रेस सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष सन्तोष कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता संकटा प्रसाद त्रिपाठी, वीरेन्द्र तिवारी, आकाश दीक्षित प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस, पीसीसी पवन देवी कोरी, संजय द्विवेदी, सत्यप्रकाश द्विवेदी, रमेश चन्द्र गुप्ता, संदीप जैन, राजबहादुर गुप्ता पूर्व शहर अध्यक्ष, इरफान खान, रेनू शर्मा, अशरफ उल्ला खान, वैश्य राजेश गुप्ता पप्पू, शोएब रिजवी, धीरेन्द्र पांडेय, इशू खान युवा कांग्रेस विधान सभा अध्यक्ष, के पी सेन, नत्थू सेन, कालीचरन साहू, कैलाशनाथ बाजपेई, ब्रजेश मिश्रा, इस्लाम, सुखदेव गांधी आदि प्रमुख कांग्रेस जन उपस्थित रहे।

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