July 27, 2026

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पूर्णिया बिहार 22 फरवरी 25 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर परी चर्चा काआयोजन।

पूर्णिया बिहार 22 फरवरी 25 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर परी चर्चा काआयोजन।

पूर्णिया बिहार 22 फरवरी 25 अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर परी चर्चा काआयोजन।

मोहम्मद इरफान कामिल यूपी आज तक चैनल पूर्णिया बिहार की रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पूर्णिया बिहार। ‌अवसर पर बंगाली एसोसिएशन द्वारा भट्ठा दुर्गाबाड़ी स्थित कार्यालय में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया और भाषा आंदोलन में बांग्लादेश में शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
परिचर्चा आरम्भ करते हुए रिटायर्ड बैंक अधिकारी आलो राय ने कहा कि अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस दुनियाभर में भाषाओं के प्रति लोगों के लगाव और बचाव के भाव को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।उन्होंने कहा कि भाषा लोगों की विविध पहचान को बढ़ावा देती है और ये आपस में लोगों को जोड़ती है तथा लोगों को उनकी संस्कृति को संरक्षित रखने का मौका भी देती है।उन्होंने कहा कि यूनेस्को ने लोगों की इसी विविधता को बढ़ावा देते हुए वर्ष 1999 में 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय भाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।उन्होंने आगे कहा कि दुनियाभर में 8 हजार से ज्यादा भाषाएं हैं जिसमें 7 हजार से ज्यादा भाषाएं आज भी प्रचलन में है और इस्तेमाल की जा रही है लेकिन इसमें से बड़ी संख्या में भाषाएं लुप्त होती जा रही है और ऐसे में लुप्त होती जा रही भाषाओं को चलन में बनाए रखने के लिए हर साल अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।
परिचर्चा में भाग लेते हुए मिठू शॉ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का इतिहास बांग्लादेश से जुड़ा है जहां बंगला भाषियों की संख्या ज्यादा थी और लोगों की मांग थी कि बंगला को मातृभाषा बनाया जाय।उन्होंने कहा कि 21 फरबरी,1952 के दिन बांग्लादेश में मातृभाषा को लेकर हुए संघर्ष में बड़ी संख्या में छात्रों को पुलिस की गोलीबारी में जान गंवानी पड़ी थी।इस अवसर पर बोलते हुए एसोसिएशन के राज्य उपाध्यक्ष ए के बोस ने कहा कि मातृभाषा दिवस मनाने का मकसद अलग अलग भाषाओं का संरक्षण करना,बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना और विविधता के महत्व पर प्रकाश डालना है साथ ही बेहतर सीख के लिए स्कूलों में अलग अलग भाषाएं सीखने पर जोर डालने के अलावा स्वदेशी आबादी के भाषाई अधिकारों रक्षा करना भी इस दिन को मनाने की एक बड़ी वजह है।सचिव रविन्द्र नाहा ने कहा कि मातृभाषा वो भाषा है जो लोग बचपन में अपने माता-पिता या देखभाल करनेवालों से सीखते हैं और समझते हैं।यह आम तौर पर पहली भाषा है,जिसे लोग बोलते हैं और जिसका उपयोग अपने घर,परिवार और समुदाय के साथ संवाद के लिए करते हैं।उन्होंने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति विशेष की पहचान का अनिवार्य हिस्सा है,क्योंकि वे उनकी संस्कृति,मूल्यों और विश्वदृष्टि को प्रतिबिंबित करते हैं।
एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य ब्यूटी दास,बंदना मुखर्जी, रंजूश्री दास और तापती साहा ने भी अपने विचार रखे।

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