अब्दुल जब्बार
अयोध्या22नवम्बर24*वीरांगना झलकारी बाई ने महिला सैनिक होते हुए 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण योगदान दिया……राम चन्द्र यादव
भेलसर(अयोध्या)झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेनापति वीरांगना झलकारी बाई ने महिला सैनिक होते हुए 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना ‘दुर्गा दल’ की सेनापति झलकारी बाई दुश्मन पर टूट पड़ती।यह बातें विधायक राम चंद्र यादव ने ग्राम ऐहार में वीरांगना झलकारी बाई की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
विधायक ने कहा कि वीरांगना का ‘जय भवानी’ पसंदीदा नारा था।जय भवानी’ का उद्घोष कर दुश्मन पर टूट पड़ने वाली वीरांगना झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को बुंदेलखंड के भोजला में हुआ था।5 अप्रैल 1858 ने अग्रेजों के विरुद्ध भारतीय विद्रोह में महत्वपूर्ण भाग लिया।कहा उनके योगदान का देश नहीं भूल सकता है। निर्धन दलित समाज के कोरी परिवार में जन्म लेनी वाली भारतीय इतिहास की महान वीरांगना के पिता सदोवा उर्फ मूलचंद कोरी और माता का नाम जमुना बाई उर्फ धनिया था।झलकारी बाई ने रानी लक्ष्मीबाई की जान बचाई और अंग्रेज़ों से युद्ध किया।जयंती के अवसर पर तीन सौ कंबल का वितरण विधायक ने निराश्रितों को किया। जयंती समारोह में समारोह को अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष किशोरी लाल भारती ने संबोधित किया। इस मौके पर पवन कुमार, बृजेश कुमार ,जमुना प्रसाद कोरी, जियालाल मदन रावत, उर्मिला कुमारी,राहुल विश्वकर्मा,अंजलि रावत,विकास मिश्रा, मास्टर अरविंद,मोहनलाल,दिनेश प्रताप सिंह रहे।
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