April 25, 2026

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कौशाम्बी14मार्च24*हमारा वर्तमान और भविष्य पर आधारित रहा मेहता महाविद्यालय के शिविर का छठा दिन*

कौशाम्बी14मार्च24*हमारा वर्तमान और भविष्य पर आधारित रहा मेहता महाविद्यालय के शिविर का छठा दिन*

कौशाम्बी14मार्च24*हमारा वर्तमान और भविष्य पर आधारित रहा मेहता महाविद्यालय के शिविर का छठा दिन*

*,भरवारी कौशाम्बी* भवंस मेहता महाविद्यालय, भरवारी में राष्ट्रीय सेवा योजना की सात दिवसीय विशेष शिविर के छठे दिन का प्रथम -सत्र ‘हमारा वर्तमान और भविष्य’ तथा द्वितीय सत्र ‘ सोशल मीडिया और समाज ‘ के लिए समर्पित रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ प्रत्येक दिन की भांति परिसर की साफ सफाई करके किया गया उसके पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा लक्ष्य गीत गाकर के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।इसके उपरांत प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर विवेक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि हम आज जो करते हैं वही हमारे भविष्य को आकार देता है। आज हम जो कदम उठाएंगे, वही तय करेंगे कि हमारा भविष्य कैसा होगा। उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि भविष्य के बारे में हमारा दृष्टिकोण हमारे वर्तमान को कैसे आकार देता है।

बड़ा बदलाव बढ़ते प्रदर्शन का दबाव पैदा कर रहा है जो हममें से अधिक से अधिक लोगों को भविष्य के बारे में खतरे पर आधारित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है विरोधाभास यह है कि प्रदर्शन का दबाव बढ़ाने वाली वही ताकतें तेजी से विस्तार के अवसर भी पैदा कर रही हैं। हम कुछ दशक पहले की कल्पना से कहीं अधिक मूल्य, कहीं अधिक तेजी से और बहुत कम संसाधनों के साथ पैदा कर सकते हैं।

चुनौती यह है कि, यदि आज हम डर से प्रेरित हैं, तो हम उन अवसरों को कभी देख ही नहीं पाएंगे, उनका पीछा करने की प्रेरणा तो दूर की बात है। हम वर्तमान में कैसे कार्य करते हैं, यह भविष्य के प्रति हमारे दृष्टिकोण पर गहराई से निर्भर करता है। आइए भविष्य के बारे में एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण विकसित करने के लिए एक साथ आएं।इसके उपरांत द्वितीय सत्र को डॉ० सतीश चंद्र तिवारी ने संबोधित किया।उन्होंने ‘सोशल मीडिया और समाज’ विषय पर बोलते हुए कहा कि वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक अहम पहलू है। इस अधिकार के उपयोग के लिये सोशल मीडिया ने जो अवसर नागरिकों को दिये हैं, एक दशक पूर्व उनकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। दरअसल, इस मंच के ज़रिये समाज में बदलाव की बयार लाई जा सकती है। लेकिन, चिंता का विषय है कि मौजूदा वक्त में सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के लिये चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।

इनके उपरांत उन्होंने सोशल मीडिया, उसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, भारत में स्थिति, सोशल मीडिया व निजता के अधिकार में संतुलन और सोशल मीडिया के विनियमन पर विस्तृत रूप से चर्चा की। कार्यक्रम अधिकारी डॉ० धर्मेन्द्र कुमार अग्रहरि ने भी स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस दौरान बच्चों ने कई कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये।

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