September 30, 2026

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दिल्ली30सितम्बर26* दुष्कर्म के झूठे केस में फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र पूरी तरह दोषमुक्त, तीस हजारी कोर्ट ने बंद किया मामला

दिल्ली30सितम्बर26* दुष्कर्म के झूठे केस में फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र पूरी तरह दोषमुक्त, तीस हजारी कोर्ट ने बंद किया मामला

दिल्ली30सितम्बर26* दुष्कर्म के झूठे केस में फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र पूरी तरह दोषमुक्त, तीस हजारी कोर्ट ने बंद किया मामला

विशेष संवाददाता नई दिल्ली से विकास जैन यूपीआजतक 

​https://youtu.be/V485EM_QCyc?si=gcuDbln1t4MazRYQ

फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र को दुष्कर्म के एक बहुचर्चित मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने सभी आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त (बरी) करते हुए केस को बंद करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि यह पूरा मामला दुर्भावनापूर्ण और झूठे आधारों पर दर्ज कराया गया था। इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कथित पीड़िता ने स्वयं यह स्वीकार कर लिया था कि उसने वसीम रिजवी के बहकावे और प्रभाव में आकर सनोज मिश्र के खिलाफ बलात्कार की मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई थी।

​मार्च में हुई थी गिरफ्तारी, करियर और साख पर लगा था दांव

​मामले की शुरुआत पिछले साल मार्च में हुई थी, जब दिल्ली पुलिस ने एक महिला की लिखित शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

​सनोज मिश्र हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के जाने-माने निर्देशक हैं। उनकी गिरफ्तारी की खबर सार्वजनिक होते ही मनोरंजन जगत से लेकर मीडिया तक में हड़कंप मच गया था। गिरफ्तारी के चलते न केवल उनके कई आगामी फिल्म प्रोजेक्ट्स रुक गए, बल्कि समाज और उद्योग में उनकी प्रतिष्ठा को भी गहरा आघात पहुंचा। मिश्र और उनके कानूनी सलाहकारों ने शुरुआत से ही इसे एक सुनियोजित साजिश और ब्लैकमेलिंग का षड्यंत्र करार दिया था।

​उच्च न्यायालय में पीड़िता का कबूलनामा: ‘वसीम रिजवी के बहकावे में दर्ज कराया केस’

​मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब जमानत याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंची। जस्टिस कठपालिया की पीठ के समक्ष कथित पीड़िता ने उपस्थित होकर स्तब्ध करने वाला खुलासा किया। महिला ने स्पष्ट रूप से अदालत को बताया कि आरोपी निर्देशक सनोज मिश्र ने उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं किया था। उसने यह भी कबूल किया कि उसने वसीम रिजवी के उकसावे और बहकावे में आकर यह झूठा मामला दर्ज कराया था।

​महिला के इस इकबालिया बयान के बाद 30 मई 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सनोज मिश्र को जमानत दे दी।

​हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी: ‘झूठे मामलों से न्याय व्यवस्था की साख पर चोट’

​जस्टिस कठपालिया की पीठ ने 30 मई 2025 को जमानत आदेश पारित करते हुए झूठे मामलों के बढ़ते चलन पर अत्यंत तीखी और गंभीर टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय ने कहा:

​“इस प्रकार के झूठे और प्रेरित मुकदमों से न्याय व्यवस्था पर से आम जनता का भरोसा डगमगाता है। किसी व्यक्ति पर ऐसे जघन्य आरोप लगाकर उसे जेल भेजने से उसके मान-सम्मान, व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा को जो अपूरणीय क्षति पहुंचती है, उसकी भरपाई किसी भी प्रकार से संभव नहीं है।”

 

​अदालत ने यह भी रेखांकित किया था कि दुष्कर्म जैसे अत्यंत संवेदनशील कानूनों का निजी रंजिश, दबाव बनाने अथवा किसी तीसरे व्यक्ति के इशारे पर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाना अत्यंत चिंताजनक है। इससे वास्तविक पीड़ितों के मामलों की विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

​तीस हजारी कोर्ट ने केस को किया बंद, मिली पूर्ण दोषमुक्ति

​उच्च न्यायालय से जमानत मिलने और जांच एजेंसियों द्वारा मामले की विस्तृत व गहन पड़ताल पूरी किए जाने के बाद यह मामला अंतिम निपटारे के लिए दिल्ली की तीस हजारी अदालत में पहुंचा।

​तीस हजारी कोर्ट की न्यायाधीश श्रेया अरोरा मेहता की अदालत में मामले की अंतिम समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट, केस डायरी और पीड़िता के स्वयं के स्वीकारोक्ति बयान को आधार बनाते हुए अदालत ने पाया कि आरोपी के विरुद्ध मुकदमे को आगे बढ़ाने का कोई विधिक या तथ्यात्मक आधार शेष नहीं बचा है। इसके बाद अदालत ने मामले को औपचारिक रूप से पूरी तरह बंद (क्लोज) करने का निर्देश दिया और निर्देशक सनोज मिश्र को सभी आरोपों से ससम्मान दोषमुक्त करार दिया।

​’साजिशकर्ताओं के खिलाफ करेंगे कानूनी कार्रवाई’

​अदालत से पूरी तरह बरी होने के बाद सनोज मिश्र और उनकी लीगल टीम ने राहत की सांस ली है। कानूनी सलाहकारों का कहना है कि यह सच्चाई और न्याय की जीत है, हालांकि इस झूठे आरोप के कारण जो मानसिक, आर्थिक और सामाजिक क्षति हुई है, वह असहनीय थी। मिश्र के कानूनी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि बिना वजह झूठे मुकदमे में फंसाने और छवि धूमिल करने की इस साजिश के पीछे शामिल लोगों और उकसाने वालों के विरुद्ध मानहानि तथा कानून के दुरुपयोग को लेकर उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

​झूठे मुकदमों पर कानूनी बहस तेज

​यह मामला एक बार फिर उन चिंताओं को सामने लाता है जो अदालतों में अक्सर उठती रही हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी व्यक्ति पर दुष्कर्म जैसा गंभीर आरोप लगता है, तो समाज उसे फैसले से पहले ही दोषी मान लेता है। भले ही बाद में वह व्यक्ति निर्दोष साबित हो जाए, लेकिन जो मानसिक प्रताड़ना और पेशेवर नुकसान वह झेलता है, उसका कोई मुआवजा नहीं हो सकता। ऐसे में झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों और पर्दे के पीछे बैठकर साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए ताकि न्याय प्रणाली का दुरुपयोग रोका जा सके।

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