मुजफ्फरनगर 15 सितंबर 26*एनएचएम के संविदा आयुष चिकित्सकों ने सौंपा ज्ञापन, बोले—एमबीबीएस के समान मिले मानदेय
*लोकेन्द्र गौतम* ब्यूरो चीफ सहारनपुर मंडल *यूपीआजतक*
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में कार्यरत संविदा आयुष चिकित्सकों ने अपने मानदेय में बढ़ोतरी और एमबीबीएस चिकित्सकों के समान वेतन दिए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। आयुष डॉक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले चिकित्सकों ने जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय की प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती शेफाली ने प्राप्त किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने कहा कि करीब 16 वर्ष पूर्व जब एनएचएम में आयुष और एमबीबीएस चिकित्सकों की संविदा पर नियुक्तियां शुरू हुई थीं, उस समय दोनों वर्गों का मानदेय समान था। उनका आरोप है कि समय के साथ राज्य सरकार ने संविदा पर कार्यरत एमबीबीएस चिकित्सकों के मानदेय में कई बार बढ़ोतरी की, लेकिन आयुष चिकित्सकों के मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नए संविदा आयुष चिकित्सकों को करीब 32 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि नए संविदा एमबीबीएस चिकित्सकों को करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। चिकित्सकों ने इस अंतर को समाप्त कर समान मानदेय की मांग की है। डॉ. सचिन जैन ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति और आयुष चिकित्सकों के उत्थान को बढ़ावा दे रही है, वहीं उत्तर प्रदेश में संविदा आयुष चिकित्सकों के मानदेय को लेकर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से चिकित्सकों में रोष बढ़ रहा है। एसोसिएशन के मंत्री डॉ. राहुल वर्मा ने कहा कि नियमित पदों पर एमबीबीएस और आयुष चिकित्सकों के मानदेय में समानता है, ऐसे में संविदा नियुक्तियों में दोनों के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस भेदभाव को समाप्त करने की मांग की।
कोषाध्यक्ष डॉ. फैजल सिद्दीकी ने कहा कि ओडिशा और बिहार सरकारों द्वारा आयुष चिकित्सकों के मानदेय में वृद्धि की गई है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इस दिशा में अभी तक ठोस कदम नहीं उठाया गया। डॉ. वेद भूषण शर्मा ने कहा कि जब अन्य राज्यों में आयुष चिकित्सकों के मानदेय में वृद्धि संभव है तो उत्तर प्रदेश में भी सरकार को सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। वहीं डॉ. देवेंद्र कुमार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांग पर जल्द ध्यान नहीं दिया तो आयुष चिकित्सक आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन देने वालों में डॉ. सचिन जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. विजीत कुमार, डॉ. शरद कुमार, डॉ. चेतन कौशिक, डॉ. मोहम्मद मियां, डॉ. वेदभूषण, डॉ. अवनीश अहलावत, डॉ. सुधा गुप्ता, डॉ. रमाशंकर, डॉ. नीतिश कुमार, डॉ. गौरव कुमार, डॉ. देवेंद्र कुमार सहित अन्य संविदा आयुष चिकित्सक मौजूद रहे।
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