पूर्णिया बिहार 11 सितंबर26 *गुलाबबाग का गणपति पूजा मेला : एक सदी पुरानी विरासत की नई पहचान*
बद्दी बाबू ईस्ट ब्लॉक पूर्णिया से
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एंकर इंट्रो:
नमस्कार, मैं हूँ श्वेता और आप देख रहे हैं आपका अपना न्यूज़ चैनल यूपी आजतक। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं बिहार के पूर्णिया स्थित गुलाबबाग के उस प्रसिद्ध मेले की कहानी से रूबरू कराने, जिसकी पहचान सिर्फ गणपति पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जुड़ी है एक सदी से भी अधिक पुरानी मेले की परंपरा और इतिहास। गुलाबबाग का गणपति पूजा मेला आज आस्था, संस्कृति, व्यापार और मनोरंजन का ऐसा संगम बन चुका है, जो हर साल बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
वीओ:
पूर्णिया के गुलाबबाग की पहचान लंबे समय से व्यापारिक गतिविधियों और मेलों के लिए रही है। यहां आयोजित होने वाला गणपति पूजा मेला आज क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। लेकिन इस मेले की कहानी केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। इसके पीछे गुलाबबाग की उस पुरानी मेला संस्कृति की विरासत भी जुड़ी हुई है, जिसकी चर्चा आज भी स्थानीय लोगों की जुबान पर सुनने को मिलती है।
बताया जाता है कि गुलाबबाग में ऐतिहासिक मेले की शुरुआत लगभग एक सदी से भी अधिक पहले हुई थी। उस दौर में यह मेला केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि दूर-दराज के इलाकों से भी व्यापारी और आम लोग यहां पहुंचते थे। मेले में खरीदारी के साथ-साथ मनोरंजन के भी कई साधन उपलब्ध हुआ करते थे।
पुराने समय में गुलाबबाग के मेले में पशु-पक्षियों की खरीद-बिक्री भी होती थी। इसके अलावा कपड़ों की दुकानें, तरह-तरह के सामान की दुकानें और खाने-पीने के स्टॉल लोगों को आकर्षित करते थे। मनोरंजन के लिए थियेटर, सर्कस, नौटंकी और जादू के खेल भी मेले की खास पहचान हुआ करते थे।
वीओ:
गुलाबबाग के इस मेले की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बिहार के अलग-अलग हिस्सों के अलावा नेपाल और पश्चिम बंगाल तक से व्यापारी और लोग यहां पहुंचते थे। यानी यह मेला सिर्फ स्थानीय आयोजन नहीं था, बल्कि आसपास के बड़े भौगोलिक क्षेत्र के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हुआ करता था।
समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और गुलाबबाग का वह पुराना मेला धीरे-धीरे कमजोर होता गया। एक समय ऐसा भी आया जब पुरानी मेला परंपरा बंद हो गई। हालांकि, गुलाबबाग की मेले वाली पहचान को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया गया। इसी परंपरा को एक नए स्वरूप में आगे बढ़ाने के लिए गणपति महोत्सव की शुरुआत की गई।
रिपोर्टों के मुताबिक, गुलाबबाग में गणपति पूजा मेले का आयोजन वर्ष 1999 से लगातार किया जा रहा है। इस तरह गणपति महोत्सव की यह परंपरा अब करीब 27 वर्षों की हो चुकी है। इतने वर्षों में यह आयोजन स्थानीय लोगों के बीच अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
वीओ:
गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और पूरे धार्मिक उत्साह के साथ पूजा-अर्चना में शामिल होते हैं। पूजा पंडालों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है।
वहीं दूसरी ओर मेले का आकर्षण बच्चों और परिवारों को भी अपनी ओर खींचता है। मेले में झूले, तरह-तरह की दुकानें, खाने-पीने के स्टॉल और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं। बच्चों के चेहरे पर मेले की रौनक साफ दिखाई देती है, तो परिवार भी एक साथ मेले का आनंद लेते नजर आते हैं।
गुलाबबाग का गणपति पूजा मेला इस मायने में खास है कि यहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है। मेले के माध्यम से नई पीढ़ी को भी उस पुरानी मेला संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है, जिसके साथ पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र के लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं।
वीओ:
गुलाबबाग का गणपति मेला आज सिर्फ पूजा का आयोजन नहीं रह गया है। यह क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यहां अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोग पहुंचते हैं और मेले की रौनक में शामिल होते हैं।
एक तरफ जहां श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यापारी और दुकानदार भी मेले के माध्यम से अपनी दुकानें लगाकर कारोबार करते हैं। बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन और परिवारों के लिए खरीदारी का अवसर इसे और खास बनाते हैं।
यही कारण है कि गुलाबबाग का गणपति पूजा मेला आज आस्था, संस्कृति, व्यापार और मनोरंजन—चारों का संगम बन चुका है। यह आयोजन न केवल वर्तमान पीढ़ी को जोड़ता है, बल्कि पुरानी मेला परंपरा की यादों को भी जीवित रखता है।
गुलाबबाग की यह विरासत यह बताती है कि समय बदलने के साथ आयोजन का स्वरूप भले ही बदल जाए, लेकिन किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और लोगों की भावनाओं से जुड़ी परंपराएं नए रूप में आगे बढ़ती रहती हैं।
एंडिंग:
एक सदी से भी अधिक पुरानी मेले की विरासत से लेकर वर्ष 1999 से लगातार आयोजित हो रहे गणपति महोत्सव तक, गुलाबबाग ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को एक नए रूप में कायम रखा है।
कैमरा पर्सन के साथ, मैं श्वेता स्वराज, पूर्णिया, बिहार।
आप देख रहे हैं आपका अपना न्यूज़ चैनल यूपी आजतक।
धन्यवाद।
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पूर्णिया के गुलाबबाग गणपति मेले का इतिहास बेहद पुराना है। जानिए एक सदी से अधिक पुरानी मेला परंपरा और 1999 से जारी गणपति महोत्सव की पूरी कहानी।
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