सहारनपुर2अगस्त24*अवैध कॉलोनीयो में चल रहे हैं निर्माण कार्य, बने विकास प्राधिकरण की मोटी कमाई का जरिया, भर रहे है अपनी तिजोरियां* ।
अवैध तरीके से बनाई जा रही कालोनी पर विकास प्राधिकरण के अधिकारी कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। दिल्ली रोड पर स्थित गांव मनोहरपुर के निकट जट फतेहपुर रोड पर स्थित कक्कड़ बैनकट हाल के पास अवैध निर्माण कार्य किया जा रहा है।
सहारनपुर जिले में जिन सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार का “पर्याय ,, माना जाता है ।उनमें विकास प्राधिकरण का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। संभवतः इसलिए आम आदमी की भाषा में इस विभाग को “विनाश प्राधिकरण ,,कहते हैं। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति तैयार करने का ऐलान किया गया था । उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ी बावजूद इसके भ्रष्टाचार को लेकर जीरो बैलेंस की नीति प्रभावी नहीं होती दिखाई दे रही हैं।
*रिस्क अधिक तो रिश्वत भी अधिक*
सच्चाई तो यह है कि सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों ने योगीराज की इस नीति को बड़ी ही चालाकी से अपने पक्ष में करके रिश्वत के रेट बढ़ा दिए हैं इस विभाग में साफ-साफ कहा जाता है कि अब रिस्क अधिक है तो इस काम करने के पैसे भी अधिक देने होंगे विकास प्राधिकरण सभी विभागों में सबसे ऊपर है वैसे तो किसी भी अवैध निर्माण को होते हुए पहले चुपचाप देखना फिर मौका देखते ही उसे भुना लेना विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की पुरानी आदत है। लेकिन अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि वैध कालोनियां या अवैध कॉलोनी में कराई जा रहे अवैध निर्माण कार्यों को भी विभाग ने “दुधारू गाय ” बना लिया है ।भरपूर भ्रष्टाचार के लिए अपनी गई विकास प्राधिकरण की इस नीति का नतीजा यह है कि आज अप्रूव्ड वह स्थापित पास कॉलोनी में भी लोग बेखोफ होकर अवैध निर्माण कर रहे हैं। जिसके न सिर्फ इन कॉलोनीयों की सुंदरता नष्ट हो रही है बल्कि सड़के संकरी की जा रही है इन लोगों की मनमानी का पूरा लाभ विकास प्राधिकरण उठा रहा है नवधनाढ्यों की यह कालोनियां आज उनके लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुकी हैं जब विकास प्राधिकरण के अधिकारी मौका मायना करने के लिए आते हैं तो बाद में खुद ही बता देते हैं कि गैर कानूनी कार्य को किस तरह कानूनी जामा पहनाना है और उसकी कीमत कितनी होगी विकास प्राधिकरण के अधिकारी मकान का स्थलीय निरीक्षण करते हैं और फिरअवैध निर्माण सहित स्टांप ड्यूटी हड़पे जाने तक का गुणा भाग निकालकर के अपनी जेब गर्म करते हैं इस प्रक्रिया में सरकार को लगने वाले चूने का लेखा जोखा छांट कर फिर सोदे बाजी की जाती है ताकि कोई पक्ष घाटे में ना रहे सरकारी खजाने को चूना लगाने वाली यह ट्रिक क्योंकि खरीदने व बेचने वालों के लिए भी यह मुफीद है इसलिए वह इस पर चुप्पी साधने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

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