April 24, 2026

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लखनऊ24अप्रैल26* ‘नकली SDM’: 3 साल तक चलाता रहा VIP रुतबा, ट्रैफिक पुलिस के एक सवाल ने कर दिया खेल खत्म!*

लखनऊ24अप्रैल26* ‘नकली SDM’: 3 साल तक चलाता रहा VIP रुतबा, ट्रैफिक पुलिस के एक सवाल ने कर दिया खेल खत्म!*

लखनऊ24अप्रैल26* ‘नकली SDM’: 3 साल तक चलाता रहा VIP रुतबा, ट्रैफिक पुलिस के एक सवाल ने कर दिया खेल खत्म!*

*एसडीएम के फर्जी नियुक्ति पर तीन साल नौकरी करने पर खड़े है सरकार की व्यवस्था पर सवाल*

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक सबको हैरान कर दिया है। पिछले 3 साल से लखनऊ में SDM (उप-जिलाधिकारी) बनकर घूम रहा एक शख्स आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। इस फर्जी अधिकारी का नाम सौरभ कुमार है, जिसने इतने लंबे समय तक बिना किसी शक के सरकारी तंत्र को ही अपनी मुट्ठी में कर रखा था।

*कैसे चला रहा था यह ‘फर्जी’ साम्राज्य?*

सौरभ कुमार का कारनामा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पिछले 3 साल से वह पूरी तरह से VIP प्रोटोकॉल का आनंद ले रहा था।

*दबदबा: वह बड़े-बड़े सरकारी कार्यक्रमों में शिरकत करता था।*

पहुंच: मंत्री और विधायकों के साथ उसकी तस्वीरें इस बात का सबूत थीं कि वह खुद को कितना ऊंचा साबित करने की कोशिश में था।पुलिस का सम्मान: दरोगा और पुलिसकर्मी उसे असली अधिकारी समझकर ‘जी सर-जी सर’ करते हुए सलाम ठोकते थे, जिससे उसका विश्वास और भी गहरा हो गया था।

*‘सिंघम’ का अहंकार बना काल*

कहते हैं न, पाप का घड़ा जब भर जाता है तो वह फूटता जरूर है। सौरभ कुमार के पकड़े जाने का किस्सा बेहद दिलचस्प है। वह अपनी गाड़ी को रॉन्ग साइड (गलत दिशा) से भगाए जा रहा था। जब ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने उसे रोका और अपनी ड्यूटी निभाते हुए टोका, तो साहब का अहंकार जाग गया।सौरभ कुमार ने दबंगई दिखाते हुए पुलिसकर्मी से कहा, “तुम्हें दिख नहीं रहा कि मैं कौन हूँ?” और फिर रौब जमाने के लिए उसने अपना फर्जी आइडेंटिटी कार्ड पुलिस अधिकारी को थमा दिया।

*पुलिस को हुआ शक और खुली पोल*

ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने जब कार्ड की जांच की, तो माजरा कुछ और ही निकला। दाल में कुछ काला महसूस होते ही पुलिस ने पूछताछ शुरू की, तो साहब की हवा निकल गई। पुलिस को देखते ही वह अपनी गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गया, लेकिन उसका बच पाना नामुमकिन था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और अंततः इस फर्जी SDM को गिरफ्तार कर लिया।फिलहाल, पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है कि आखिर 3 साल तक प्रशासन की नजरों से बचकर वह कैसे सरकारी फाइलों और प्रोटोकॉल का हिस्सा बना रहा। यह घटना न केवल सुरक्षा चूक पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे दिखावे की दुनिया में ‘पद’ का दुरुपयोग किया जा सकता है।

Taza Khabar