October 4, 2026

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हरिद्वार 2 अक्टूबर 26*रामपुर तिराहा कांड की बरसी: हरिद्वार में 113 राज्य आंदोलनकारियों ने गोविंद घाट पर किया दीपदान,

हरिद्वार 2 अक्टूबर 26*रामपुर तिराहा कांड की बरसी: हरिद्वार में 113 राज्य आंदोलनकारियों ने गोविंद घाट पर किया दीपदान,

हरिद्वार 2 अक्टूबर 26*रामपुर तिराहा कांड की बरसी: हरिद्वार में 113 राज्य आंदोलनकारियों ने गोविंद घाट पर किया दीपदान,

सरकार पर मूल अधिकारों की उपेक्षा का आरोप

​हरिद्वार (कालूराम जयपुरिया, यूपीआजतक):

हरिद्वार *2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर अलग राज्य की मांग कर रहे उत्तराखंडियों पर हुआ बर्बर गोलीकांड आज भी प्रदेश के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है। इसी त्रासदी के अमर शहीदों को नमन करते हुए आज 2 अक्टूबर को ‘उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति’ के बैनर तले 113 आंदोलनकारियों ने हरिद्वार के गोविंदपुरी स्थित गोविंद घाट पर एकत्रित होकर दीपदान किया और वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

​इस अवसर पर गंगा की पावन लहरों में दीप प्रवाहित कर रामपुर तिराहा कांड के शहीदों के बलिदान को याद किया गया। इसके उपरांत आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने शहीदों के सपनों के उत्तराखंड और वर्तमान राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों पर गहरा क्षोभ प्रकट किया।

​32 साल बाद भी न्याय अधूरा: सतीश जोशी

​श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सतीश जोशी ने रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को सजा न मिलने पर कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि घटना के 32 वर्ष बीत जाने के बाद भी मुजफ्फरनगर कांड के बर्बर दोषियों और षड्यंत्रकारियों को कानून के कटघरे में खड़ा कर उचित सजा नहीं दिलाई जा सकी, जो कि पूरे समाज और न्याय व्यवस्था के लिए एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है।

​सतीश जोशी ने राजनीतिक दलों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक अन्याय के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस दोनों ही समान रूप से जिम्मेदार हैं। दोनों ही दलों ने बारी-बारी से सत्ता का सुख भोगा, लेकिन शहीदों को न्याय दिलाने और उनके देखे गए सपनों को धरातल पर उतारने के लिए कोई ठोस व ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। शहीदों ने जिस स्वाभिमानी, आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखंड का सपना संजोया था, उसे आज के राजनीतिक तंत्र ने पूरी तरह चकनाचूर कर दिया है।

​जल, जंगल, जमीन और रोजगार पर संकट

​सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान में प्रदेश की सरकार जल, जंगल, जमीन और रोजगार के मामले में जनविरोधी नीतियों पर चल रही है। सतीश जोशी एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासियों के पारंपरिक हक-हकूक सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेश की बेशकीमती सरकारी जमीनों, पर्यटन आवास गृहों, होटलों और रोजगार के मुख्य साधनों को बाहरी पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है।

​परिणामस्वरूप, राज्य का मूल निवासी और युवा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। पहाड़ से बुनियादी सुविधाओं का अभाव और रोजगार के संकट के चलते पलायन बदस्तूर जारी है। जिस राज्य की कल्पना यहां के युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए की गई थी, वहीं के युवा आज रोजी-रोटी की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

​प्रमुख वक्ताओं ने उठाई जनसंघर्ष की आवाज

​श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख आंदोलनकारियों ने जनसमस्याओं को लेकर फिर से एकजुट होने का आह्वान किया। सभा को संबोधित करने वाले मुख्य वक्ताओं में शामिल रहे:

  • ​जगत सिंह रावत
  • ​विजया जोशी
  • ​सरोजिनी जोशी
  • ​सूर्यकांत भट्ट
  • ​भीमसेन रावत
  • ​प्रवीण कुमार
  • ​उमाशंकर वशिष्ठ
  • ​राजेश लाखेड़ा
  • ​योगेश ऋंगवाल
  • ​महेंद्र सिंह वर्मा
  • ​तेज सिंह रावत

​वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष केवल पृथक राज्य की सीमा तय करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास, स्वाभिमान और न्याय पहुंचाना था। जब तक रामपुर तिराहा के दोषियों को सजा नहीं मिल जाती और उत्तराखंड के संसाधनों पर मूल निवासियों का पहला अधिकार स्थापित नहीं होता, तब तक यह वैचारिक लड़ाई जारी रहेगी।

​श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ा आंदोलनकारियों का हुजूम

​गोविंद घाट पर आयोजित दीपदान एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं वरिष्ठ आंदोलनकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख आंदोलनकारियों में:

​खुशहाल सिंह राणा, ख्यात सिंह रावत, भगवान जोशी, महीपत सिंह नेगी, के. एन. जोशी, कालूराम जयपुरिया, विष्णु दत्त सेमवाल, के. पी. काला, गोपाल दत्त जोशी, डॉ. हरिनारायण जोशी, भगवान सिंह उत्तराखंडी, रोहित प्रताप सिंह, जमुना देवी, डी. सी. नौटियाल, गंगा दत्त शर्मा, गिरीश भट्ट, शशि भूषण घिल्डियाल, सरोज भट्ट, रमेश चंद नैथानी, बलवीर सिंह नेगी, अंजू उप्रेती, पुष्पा देवी, भगवान सिंह चौहान, विजय कृष्ण खंडूरी, साकेत वशिष्ठ, श्रीचंद बुटोला, गोविंद प्रसाद बडोनी, शूरवीर सिंह राणा, जे. पी. बड़ाकोटी, तारा दत्त जोशी, गोपाल दत्त जोशी, राजेंद्र प्रसाद ममगांई, रमेश चंद्र पंत, मंगली देवी रावत, धर्मा देवी पयाल, विमला बलूनी, सरोज बहुगुणा, बबीता डंडरियाल, कांति बड़ाकोटी, सरला नेगी, ललित मोहन जोशी, अरुण बड़ाकोटी, शांति गुसांई, जगदीश सिंह रावत, मोहन सिंह रावत, उर्मिला देवी, प्रमोद सिंह पोखरियाल, चंद्र सिंह बर्थवाल, नरेंद्र सिंह, प्रताप सिंह नेगी, एस. पी. मुलासी, गिरीश ध्यानी, देवेंद्र कंडारी, शीशपाल सिंह राणा, सुनील रावत, मुसी चौहान, विमला देवी, मथुरा देवी, सोना देवी, सरला कलूड़ा, मंगसीरी कुमाई, हेमा पंत, देवेश्वरी घिल्डियाल, सरोज रावत, छवि असवाल, गीता कालुडा, मीना चौहान, भूरी देवी, जमुना देवी, अनिल रतूड़ी, ज्ञान देवी चौहान, नारायणी देवी, अनीता पंवार, जयप्रकाश मलकोटी, आनंद सिंह, शीशपाल पोखरियाल, डी. सी. नौटियाल, मीना चौहान, भगवान सिंह रावत, विमला मालकोटी, विनोद प्रकाश शर्मा, चैत सिंह रावत, गिरीश भट्ट, गुलाब सिंह थपलियाल, धर्मेंद्र घिल्डियाल, उमेद सिंह रावत, भगवती प्रसाद सती, माधवानंद पंत, शीशपाल सिंह राणा, चंद्रधर काला, जगदीश प्रसाद मंमगाई, हेमा पंत, उर्मिला बडोनी, देवकी बिष्ट, सरोज भट्ट, गजेंद्र सिंह वर्मा, विमला कुमाईं, सरोज भट्ट एवं भूपेंद्र भट्ट आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

​कार्यक्रम का समापन शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर और राज्य हित से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।

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