May 1, 2026

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भागलपुर28अप्रैल26*नगर आयुक्त एवं मेयर को 9 बिन्दु पर ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र लिखा है।

भागलपुर28अप्रैल26*नगर आयुक्त एवं मेयर को 9 बिन्दु पर ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र लिखा है।

भागलपुर बिहार से शैलेन्द्र कुमार गुप्ता

भागलपुर28अप्रैल26*नगर आयुक्त एवं मेयर को 9 बिन्दु पर ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र लिखा है।

 

भागलपुर नगर निगम द्वारा ट्रेड लाइसेन्स शुल्क में अतिरिक्त स्लैब जोड़ कर व्यवसाइयों पर अतिरिक्त बोझ डालने का विरोध करते हुए ईस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भागलपुर नगर निगम के नगर आयुक्त एवं मेयर को 9 बिन्दु पर ध्यान आकर्षित करते हुए पत्र लिखा है।
1. तिहरी कर देनदारी: व्यवसायियों को दुकान, ऑफिस आदि के लिए नगर निगम को व्यावसायिक होल्डिंग टैक्स देना पड़ता है। पुनः नगर निगम द्वारा ट्रेड लाइसेन्स शुल्क लिया जाता है। प्रोफेशनल टैक्स के साथ इसे देखा जाए तो व्यवसायियों पर तिहरी टैक्स देनदारी पहले से है। टर्नओवर आधारित शुल्क के अतिरिक्त स्लैब से यह बोझ और बढ़ेगा।
2. एमएसएमई पर असर: छोटे और मध्यम उद्यम (MSMEs) का टर्नओवर अधिक दिख सकता है, लेकिन उनका लाभांश बहुत कम होता है। टर्नओवर आधारित शुल्क से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता घटेगी।
3. अनुपालन की जटिलता: कारोबारियों को हर साल टर्नओवर प्रमाणित करने के लिए ऑडिट रिपोर्ट या आयकर दस्तावेज़ देने होंगे, जिससे अनुपालन का बोझ बढ़ेगा।
4. निवेश हतोत्साहित होगा: अतिरिक्त शुल्क से नए उद्यमी और निवेशक हतोत्साहित होंगे, जिससे स्थानीय रोजगार और विकास प्रभावित होगा।
5. असमानता: समान टर्नओवर वाले व्यवसायों की लाभप्रदता अलग-अलग होती है। केवल टर्नओवर पर आधारित शुल्क असमान और अनुचित है।
6. दोहरी कराधान का मुद्दा: प्रोफेशनल टैक्स पहले से ही आय/टर्नओवर से जुड़ा है। नगर निगम द्वारा उसी आधार पर शुल्क लेना दोहरी कराधान (double taxation) की श्रेणी में आएगा।
7. उद्योग नीति के विपरीत: राज्य की एमएसएमई प्रोत्साहन नीति उद्यमियों को राहत देने की बात करती है। टर्नओवर आधारित शुल्क उस नीति के विपरीत है।
8. अनलाइन शॉपिंग के वजह से स्थानीय व्यवसायी पहले से दवाब में हैं, अतः उनपर अतिरिक्त बोझ देने से पहले संवेदनशीलता से विचार करना आवश्यक है।
9. ट्रेड लाइसेन्स का उद्देश्य: ट्रेड लाइसेंस का मूल उद्देश्य व्यवसाय को कानूनी रूप से मान्यता देना था। नगर निगम को इसके द्वारा यह अधिकार मिला था कि वे अपने क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित और व्यवस्थित कर सकें ताकि सार्वजनिक हित सुरक्षित रह सके। इसे कर संग्रह का जरिया बनाना व्यापारिक हित में अनुचित होगा।
अध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने पत्र में नगर आयुक्त एवं मेयर से आग्रह किया है कि इसपर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक निर्देश दें। पीआरओ सुमित जैन ने बताया कि इबिया ने इस मुद्दे पर नगर आयुक्त एवं मेयर से सभी व्यावसायिक संगठनों की एक बैठक बुलाकर विचार करने का आग्रह भी किया है।