नई दिल्ली0️⃣1️⃣❗0️⃣5️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ यूपीआजतक न्यूज चैनल पर♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️
*!! दृष्टिकोण की ताकत !!*
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एक छोटे से शहर में रवि नाम का बालक रहता था। वह पढ़ाई में ठीक-ठाक था, पर हर छोटी असफलता से घबरा जाता था। एक दिन गणित की परीक्षा में कम अंक आए तो उसने तय कर लिया कि वह इस विषय में कभी अच्छा नहीं कर पाएगा।
उसके विद्यालय में एक वृद्ध शिक्षक थे — शांत स्वभाव, गहरी दृष्टि और कम शब्दों में बड़ी बात कहने वाले। उन्होंने रवि को उदास देखा और पास बुलाया।
“क्या हुआ?”
रवि बोला, “सर, मैं गणित में कमजोर हूँ। कितनी भी कोशिश कर लूँ, मुझसे नहीं होगा।”
शिक्षक मुस्कुराए और उसे विद्यालय के बगीचे में ले गए। वहाँ दो गमले रखे थे। एक में हरा-भरा पौधा था, दूसरे में सूखी मिट्टी।
शिक्षक ने पूछा, “इन दोनों में फर्क क्या है?”
रवि बोला, “एक में पानी और देखभाल मिली है, इसलिए हरा है। दूसरे को शायद पानी नहीं मिला।”
शिक्षक ने कहा, “बिलकुल सही। अब सोचो, अगर हम सूखी मिट्टी वाले गमले को रोज़ पानी दें, धूप दें, देखभाल करें तो क्या होगा?”
“वह भी हरा हो जाएगा,” रवि ने तुरंत उत्तर दिया।
शिक्षक ने गंभीर होकर कहा, “बेटा, इंसान का दिमाग भी ऐसा ही गमला है। यदि तुम उसे ‘मैं नहीं कर सकता’ की सूखी सोच दोगे, तो वह बंजर हो जाएगा। लेकिन यदि तुम उसे ‘मैं सीख सकता हूँ’ का पानी दोगे, तो वह अवश्य हरा-भरा होगा।”
ये शब्द रवि के मन में गूंजते रहे। उसने निर्णय लिया कि अब वह ‘कमजोर हूँ’ नहीं, बल्कि ‘सीख रहा हूँ’ कहेगा। उसने रोज़ थोड़ा-थोड़ा अभ्यास शुरू किया। गलती होती, तो घबराने के बजाय समझने की कोशिश करता।
कुछ महीनों बाद परिणाम आया — इस बार रवि ने गणित में अच्छे अंक प्राप्त किए। वह खुशी से शिक्षक के पास दौड़ा।
शिक्षक ने कहा, “अंक तो केवल परिणाम हैं। असली जीत तुम्हारे दृष्टिकोण की है। जब सोच बदलती है, तब जीवन बदलता है।”
रवि ने उस दिन समझ लिया कि असफलता कमजोरी नहीं, सुधार का अवसर है।
*शिक्षा:-*
हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारा दृष्टिकोण है। परिस्थिति नहीं, सोच बदलने से सफलता के द्वार खुलते हैं।
*सदैव प्रसन्न रहिये — जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन सकारात्मक है — उसका जीवन उज्ज्वल है।।*
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[01/05, 07:08] +91 95191 91829: 🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌤️ *दिनांक – 01 मई 2026*
🌤️ *दिन – शुक्रवार*
🌤️ *विक्रम संवत – 2083 (गुजरात अनुसार 2082)*
🌤️ *शक संवत – 1948*
🌤️ *अयन – उत्तरायण*
🌤️ *ऋतु – ग्रीष्म ऋतु*
🌤️ *मास – वैशाख*
🌤️ *पक्ष – शुक्ल*
🌤️ *तिथि – पूर्णिमा रात्रि 10:52 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
🌤️ *नक्षत्र – स्वाती 02 मई प्रातः 04:35 तक तत्पश्चात विशाखा*
🌤️ *योग – सिद्धि रात्रि 09:13 तक तत्पश्चात व्यतीपात*
🌤️*राहुकाल – सुबह 10:59 से दोपहर 12:36 तक*
🌤️ *सूर्योदय – 06:09*
🌤️ *सूर्यास्त – 07:02*
👉 *दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण – व्रत पूर्णिमा, वैशाखी पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख स्नान समाप्त, व्यतीपात योग,(रात्रि 09:13 से 02 मई रात्रि 09:45 तक)*
💥 *विशेष – पूर्णिमा एवं व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🚩~*सनातन पंचांग* ~🚩
🌷 *वैशाख पूर्णिमा* 🌷
*हिन्दू धर्म में वैशाख महिने की पूर्णिमा तिथि भी भगवान विष्णु व शक्ति स्वरूपा देवी लक्ष्मी की उपासना के लिए बहुत शुभ बताई गई है। माता लक्ष्मी को सुख-समृद्धि, धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माना गया है।*
🙏🏻 *वैशाख पूर्णिमा यानी 01 मई, शुक्रवार को देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए नीचे बताएँ उपाय करना भी शुभ व सुख- ऐश्वर्य देने वाला माना गया है-*
🙏🏻 *- सुबह के साथ ही खासकर शाम के वक्त भी स्नान कर माता लक्ष्मी की प्रतिमा की सामान्य पूजा कर इस मंत्र का जप आर्थिक परेशानियों को दूर करने वाला होगा।*
🌹 *- माता लक्ष्मी को लाल चन्दन, लाल अक्षत, लाल वस्त्र, लाल फूल, मौसमी फल, मिठाई अर्पित करें।*
🍚 *- माता को दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। बाद में देवी लक्ष्मी को इस वैदिक मंत्र स्तुति के उपाय का यथाशक्ति जप करें-*
🌷 *ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥*
🔥 *- पूजा और मंत्र जप के बाद घी के दीप से माता लक्ष्मी की आरती करें।*
🔥 *- आरती के बाद धन प्राप्ति और सुखी जीवन की कामना करते हुए पूजा-आरती में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🌷 *कभी स्नान ना कर सकें तो* 🌷
🌿 *तुलसी के पौधे की मिटटी इतनी पवित्र है कि कोई आदमी घर में बहुत बीमार हो नहा नही सकता हो तो आप उसको तुलसी की मिटटी का तिलक कर दो वो आदमी नहाया हुआ जैसा पवित्र माना जायेगा | (मेरे से एक मिलिट्री में काम करने वाले भाई ने पूछा था कि हम ऐसी जगहों पर रहते हैं जहाँ बर्फ ही बर्फ होती है पानी तो होता नहीं नहाये कैसे, इतनी ठण्ड होती है माईनस में होता है टेम्परेचर क्या करें ? नियम कैसे करें ? मैंने कहा आश्रम में आये हो तुलसी की मिटटी ले जाओ जितने दिन रहना पड़े उसका तिलक कर लो नहाये हुए के सामान माने जाओगे पवित्र तुलसी की मिटटी इतनी शुद्ध है | ) इसका मतलब ये नही है कि और भी कोई सोचे की वाह बढ़िया आईडिया है कभी नहाना नही और तुलसी की मिटटी का तिलक कर दो हो गया पवित्र हो गये हम तो |*
🙏🏻 *श्री सुरेशानंदजी – Haridwar 7th May’ 2012*
📖 *सनातन पंचांग संपादक ~ अंजनी बहेन निलेश ठक्कर*
📒 *सनातन पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*
🚩 *~ सनातन पंचांग ~* 🚩
🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🌷🙏🏻
[01/05, 07:12] +91 87658 77512: 🕉️
*यदि आपको लगता है कि हर समय आप सही है तो, आप सीखने का दरवाजा बन्द कर देते हैं सच्ची समझदारी सुनने,सोचने और सुधार करने के लिए तैयार रहने में है…!!*
*राम राम*
🙏
[01/05, 07:12] +91 87658 77512: *पत्थर में एक ही कमी है कि वो पिघलता नही*
*लेकिन यही उसकी खूबी है कि वो बदलता भी नही*
*उल्फत बदल गई, कभी नियत बदल गई*
*खुदगर्ज जब हुए, तो फिर सीरत बदल गई*
*अपना कुसूर, दूसरों के सर पर डाल कर*
*कुछ लोग सोचते हैं,*
*हकीकत बदल गई*
*सावधान रहे ऐसे लोगो से जो दिन भर दुसरो की बुराई करते हैं और खुद तो कुछ नही करेंगे पर लोगो से केवल सवाल करेंगे । अब उनसे सावल करना शुरु कर दे कि आप क्या कर रहे हैं और आपका क्या योगदान है फिर देखिए इनका असली चेहरा ।*
🌞🌻🌼🙏🏻🙏🏻🌼🌻🌞
*जय श्री राम । जय श्री राम*
*धर्म की जय हो।*
*अधर्म का नाश हो॥*
*प्राणियों में सद्भावना हो।*
*विश्व का कल्याण हो।*
*वंदेभारत । शुभ दिवस*
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
*2026*
[01/05, 07:12] +91 87658 77512: 🍃🌾🌾
*01 MAY 2026*
*🦋 आज की प्रेरणा 🦋*
किसी भी बात को बढ़ा-चढ़ाकर बोलना, उस बात की विश्वासनीयता को कम कर देता है क्योंकि अतिशयोक्ति झूठ की शाखा है।
*आज से हम* अतिशयोक्ति से बचें…
*💧 TODAY’S INSPIRATION 💧*
To exaggerate is to weaken.
For, exaggeration is a branch of lying!
*TODAY ONWARDS LET’S..* refrain from exaggeration.
🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃
[01/05, 07:12] +91 87658 77512: *🏵️महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन🏵️*
महाभारत को हम सही मायने में विश्व का प्रथम विश्वयुद्ध कह सकते हैं क्योंकि शायद ही कोई ऐसा राज्य था जिसने इस युद्ध में भाग नहीं लिया।
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आर्यावर्त के समस्त राजा या तो कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े दिख रहे थे। श्रीबलराम और रुक्मी ये दो ही व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में भाग नहीं लिया।
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कम से कम हम सभी तो यही जानते हैं। किन्तु एक और राज्य ऐसा था जो युद्ध क्षेत्र में होते हुए भी युद्ध से विरत था। वो था दक्षिण के “उडुपी” का राज्य।
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जब उडुपी के राजा अपनी सेना सहित कुरुक्षेत्र पहुँचे तो कौरव और पांडव दोनों उन्हें अपनी ओर मिलाने का प्रयत्न करने लगे।
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उडुपी के राजा अत्यंत दूरदर्शी थे। उन्होंने श्रीकृष्ण से पूछा – “हे माधव ! दोनों ओर से जिसे भी देखो युद्ध के लिए लालायित दिखता है किन्तु क्या किसी ने सोचा है कि दोनों ओर से उपस्थित इतनी विशाल सेना के भोजन का प्रबंध कैसे होगा ?
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इस पर श्रीकृष्ण ने कहा – महाराज ! आपने बिलकुल उचित सोचा है। आपके इस बात को छेड़ने पर मुझे प्रतीत होता है कि आपके पास इसकी कोई योजना है। अगर ऐसा है तो कृपया बताएं।
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इसपर उडुपी नरेश ने कहा – “हे वासुदेव ! ये सत्य है। भाइयों के बीच हो रहे इस युद्ध को मैं उचित नहीं मानता इसी कारण इस युद्ध में भाग लेने की इच्छा मुझे नहीं है।
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किन्तु ये युद्ध अब टाला नहीं जा सकता इसी कारण मेरी ये इच्छा है कि मैं अपनी पूरी सेना के साथ यहाँ उपस्थित समस्त सेना के भोजन का प्रबंध करूँ।
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इस पर श्रीकृष्ण ने हर्षित होते हुए कहा – “महाराज ! आपका विचार अति उत्तम है। इस युद्ध में लगभग 5000000 (50 लाख) योद्धा भाग लेंगे और अगर आप जैसे कुशल राजा उनके भोजन के प्रबंधन को देखेगा तो हम उस ओर से निश्चिंत ही रहेंगे।
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वैसे भी मुझे पता है कि सागर जितनी इस विशाल सेना के भोजन प्रबंधन करना आपके और भीमसेन के अतिरिक्त और किसी के लिए भी संभव नहीं है।
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भीमसेन इस युद्ध से विरत हो नहीं सकते अतः मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप अपनी सेना सहित दोनों ओर की सेना के भोजन का भार संभालिये।” इस प्रकार उडुपी के महाराज ने सेना के भोजन का प्रभार संभाला।
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पहले दिन उन्होंने उपस्थित सभी योद्धाओं के लिए भोजन का प्रबंध किया। उनकी कुशलता ऐसी थी कि दिन के अंत तक एक दाना अन्न का भी बर्बाद नहीं होता था।
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जैसे-जैसे दिन बीतते गए योद्धाओं की संख्या भी कम होती गयी। दोनों ओर के योद्धा ये देख कर आश्चर्यचकित रह जाते थे कि हर दिन के अंत तक उडुपी नरेश केवल उतने ही लोगों का भोजन बनवाते थे जितने वास्तव में उपस्थित रहते थे।
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किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उन्हें ये कैसे पता चल जाता है कि आज कितने योद्धा मृत्यु को प्राप्त होंगे ताकि उस आधार पर वे भोजन की व्यवस्था करवा सकें।
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इतने विशाल सेना के भोजन का प्रबंध करना अपने आप में ही एक आश्चर्य था और उसपर भी इस प्रकार कि अन्न का एक दाना भी बर्बाद ना हो, ये तो किसी चमत्कार से कम नहीं था।
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अंततः युद्ध समाप्त हुआ और पांडवों की जीत हुई। अपने राज्याभिषेक के दिन आख़िरकार युधिष्ठिर से रहा नहीं गया और उन्होंने उडुपी नरेश से पूछ ही लिया
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हे महाराज ! समस्त देशों के राजा हमारी प्रशंसा कर रहे हैं कि किस प्रकार हमने कम सेना होते हुए भी उस सेना को परास्त कर दिया जिसका नेतृत्व पितामह भीष्म, गुरु द्रोण और हमारे ज्येष्ठ भ्राता कर्ण जैसे महारथी कर रहे थे।
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किन्तु मुझे लगता है कि हम सब से अधिक प्रशंसा के पात्र आप है जिन्होंने ना केवल इतनी विशाल सेना के लिए भोजन का प्रबंध किया अपितु ऐसा प्रबंधन किया कि एक दाना भी अन्न का व्यर्थ ना हो पाया। मैं आपसे इस कुशलता का रहस्य जानना चाहता हूँ।
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इसपर उडुपी नरेश ने हँसते हुए कहा – “सम्राट ! आपने जो इस युद्ध में विजय पायी है उसका श्रेय किसे देंगे ?
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इसपर युधिष्ठिर ने कहा “श्रीकृष्ण के अतिरिक्त इसका श्रेय और किसे जा सकता है ? अगर वे ना होते तो कौरव सेना को परास्त करना असंभव था।
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तब उडुपी नरेश ने कहा “हे महाराज ! आप जिसे मेरा चमत्कार कह रहे हैं वो भी श्रीकृष्ण का ही प्रताप है।” ऐसा सुन कर वहाँ उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए।
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तब उडुपी नरेश ने इस रहस्य पर से पर्दा उठाया और कहा – “हे महाराज! श्रीकृष्ण प्रतिदिन रात्रि में मूँगफली खाते थे।
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मैं प्रतिदिन उनके शिविर में गिन कर मूँगफली रखता था और उनके खाने के पश्चात गिन कर देखता था कि उन्होंने कितनी मूंगफली खायी है।
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वे जितनी मूँगफली खाते थे उससे ठीक 1000गुणा सैनिक अगले दिन युद्ध में मारे जाते थे। अर्थात अगर वे 50 मूँगफली खाते थे तो मैं समझ जाता था कि अगले दिन 50000 योद्धा युद्ध में मारे जाएँगे।
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उसी अनुपात में मैं अगले दिन भोजन कम बनाता था। यही कारण था कि कभी भी भोजन व्यर्थ नहीं हुआ।” श्रीकृष्ण के इस चमत्कार को सुनकर सभी उनके आगे नतमस्तक हो गए।
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ये कथा महाभारत की सबसे दुर्लभ कथाओं में से एक है। कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित कृष्ण मठ में ये कथा हमेशा सुनाई जाती है।
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ऐसा माना जाता है कि इस मठ की स्थापना उडुपी के सम्राट द्वारा ही करवाई गयी थी जिसे बाद में श्री माधवाचार्य जी ने आगे बढ़ाया।

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