बिहार 11जुलाई25*चुनाव से पहले विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में सामान्य प्रक्रिया को अपनाने के बजाय अतिरिक्त जानकारी
एक बात समझ में नहीं आती कि आखिरकार चुनाव आयोग बिहार चुनाव से पहले विशेष मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में सामान्य प्रक्रिया को अपनाने के बजाय अतिरिक्त जानकारी क्यों एकत्रित कर रहा है, जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त महोदय को भी अपने माता-पिता की समस्त जानकारी मिलना मुश्किल होगी,
अभी तक मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम में सामान्य प्रक्रिया के तहत नियम यह था कि व्यक्ति किसी शहर कस्बे या गांव में विगत तीन वर्षों से रह रहा है तो उसका नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाता था,
अब ऐसी कौन सी आफत आ गई कि २००३(शायद) के बाद जन्मे लोगों को अपने माता-पिता का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है,
अगर यही करना था तो २०२४ के चुनाव के पहले करना चाहिए था,ताकि किसी को कोई आपत्ति नहीं होती, और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता,
देश की जनता को यह पूछने का अधिकार है कि चुनाव आयोग अपनी नियत को स्पष्ट करे, हालांकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और देश की जनता को विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट जनता को निराश नहीं करेगा।

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