May 22, 2026

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पूर्णिया बिहार 22 मई26* खेल से पाठशाला तक: दौगच्छी में SRM मेले ने खोली सीखने की खिड़की

पूर्णिया बिहार 22 मई26* खेल से पाठशाला तक: दौगच्छी में SRM मेले ने खोली सीखने की खिड़की

पूर्णिया बिहार 22 मई26* खेल से पाठशाला तक: दौगच्छी में SRM मेले ने खोली सीखने की खिड़की

मोहम्मद इरफान कामिल यूपीआजतक न्यूज़ चैनल पूर्णिया डीवीजन बिहार

पूर्णिया, बिहार |*कसबा के दौगच्छी गांव में बुधवार को आंगनबाड़ी का आंगन पाठशाला बन गया। प्रथम संस्था और आईसीडीएस के साझा प्रयास से स्कूल रेडीनेस मेला का आयोजन हुआ। सेक्टर-6 की सेविका सविता कुमारी और परवीन कौसर के नेतृत्व में सात स्वयंसेविकाओं ने पूरे मेले को संभाला। मकसद साफ था: नौनिहालों को खेल-खेल में स्कूल के लिए तैयार करना।

✦ गांव से अफसर तक, सबने थामी डोर ✦
मेले में प्रथम संस्था के राज्य प्रोग्राम हेड सरोज झा, डिविजनल हेड रितेश कुमार, डिस्ट्रिक्ट लीडर फ़रहत जहां, सीआईएम कुमारी माधवी झा, रिया कुमारी और समाजसेवी अनिल चौरसिया पहुंचे। आयोजन से पहले सेविकाओं ने घर-घर जाकर अभिभावकों को जोड़ा और स्वयंसेवकों को हर स्टॉल की बारीकी सिखाई। तभी मेला इतने सलीके से सजा।

✦ सात रंग, सात कदम विकास के ✦
मेले को सात हिस्सों में बांटा गया था, ताकि बच्चे का हर पहलू निखरे।
पंजीकरण डेस्क पर बच्चों का नाम, कद और वजन दर्ज हुआ। अभिभावक के दस्तखत के बाद बच्चे अगले पड़ाव पर बढ़े।
शारीरिक विकास कोना में टेढ़ी-मेढ़ी लकीर पर संतुलन साधना, रस्सी कूद, कागज का पंखा बनाना और रंग भरने का काम हुआ।
बौद्धिक विकास खंड में रंग पहचानने, चीजों को क्रम से सजाने और मिलान करने के खेल हुए।
भाषा की दुनिया में बच्चों ने तस्वीरें देखकर नाम बताए, अपनी पसंद की चीजें गिनाईं और आसान अक्षर पढ़े।
गणित की पहली सीढ़ी पर एक से नौ तक गिनती, जोड़-घटाव और आकृति मिलान कराया गया।
मन और मेलजोल कोना में बच्चों ने अपना और मां का नाम बताया, पसंदीदा खाना साझा किया और खुशी-गम के भाव पहचाने।
सुझाव डेस्क पर अभिभावकों ने मेले का अनुभव बताया और आगे के लिए राय दी।

✦ अब मोबाइल बनेगा मास्टरजी ✦
सेविकाओं को बताया गया कि अगले चार हफ्ते तक अभिभावकों के व्हाट्सएप पर कहानी, वीडियो और छोटी गतिविधियां भेजी जाएंगी। इससे बच्चे घर बैठे भी सीखते रहेंगे और स्कूल जाने का डर खत्म होगा।

✦ “बुनियाद पक्की तो इमारत मजबूत” ✦
प्रथम संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि एसआरएम मेला बच्चों के लिए स्कूल की पहली सीढ़ी है। यहां भाषा, गणित, शरीर और व्यवहार की तैयारी एक साथ होती है। मेले के बाद सेविकाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास और अभिभावकों की आंखों में उम्मीद साफ दिखी। गांव वालों ने मांग की कि ऐसा मेला हर साल लगे, ताकि कोई बच्चा पढ़ाई में पीछे न रहे।

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