April 15, 2026

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पूर्णिया बिहार 14 अप्रैल26 *पूर्णिया में अंबेडकर जयंती पर जनसैलाब, नीले समंदर में बदला शहर; पप्पू यादव ने लगाए जय भीम के नारे*

पूर्णिया बिहार 14 अप्रैल26 *पूर्णिया में अंबेडकर जयंती पर जनसैलाब, नीले समंदर में बदला शहर; पप्पू यादव ने लगाए जय भीम के नारे*

पूर्णिया बिहार 14 अप्रैल26 *पूर्णिया में अंबेडकर जयंती पर जनसैलाब, नीले समंदर में बदला शहर; पप्पू यादव ने लगाए जय भीम के नारे*

पूर्णिया बिहार से मोहम्मद इरफान कामिल की खास रिपोर्ट यूपी आजतक

पूर्णिया बिहार : संविधान शिल्पी भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर पूर्णिया सामाजिक समरसता के रंग में रंगा नजर आया। राजकीय वैद्यनाथ कल्याण छात्रावास से निकली विराट शोभा यात्रा में उमड़ा जनसैलाब देखते ही बन रहा था। हजारों हाथों में नीले ध्वज, बाबासाहेब की तस्वीरें और ‘जय भीम’ की गूंज ने पूरे शहर का माहौल बदल दिया।
शोभा यात्रा की अगुवाई कर रहे सांसद पप्पू यादव पूरे जोश में दिखे। ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर थिरकते हुए वे लगातार ‘जय भीम’ का उद्घोष करते रहे। उनके साथ मेयर विभा कुमारी, समाजसेवी जितेंद्र यादव और कांग्रेस शहरी जिलाध्यक्ष कुमार आदित्य भी कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। सामाजिक न्याय, समता और शिक्षा का संदेश देती मनमोहक झांकियां यात्रा का मुख्य आकर्षण रहीं।
प्रभात कॉलोनी स्थित वैद्यनाथ कल्याण छात्रावास से शुरू होकर यह कारवां भोला पासवान शास्त्री चौक, गिरिजा चौक, आर एन साह चौक, भट्टा बाजार, झंडा चौक, रजनी चौक और लाइन बाजार का भ्रमण करते हुए पुनः छात्रावास परिसर में संपन्न हुआ। रास्ते भर जगह-जगह बनाए गए तोरणद्वार और शरबत-खीर के स्टॉल लोगों का उत्साह बढ़ाते रहे।
आयोजन समिति के विक्रम झा, अजय भारती और रंजीत पासवान ने बताया, “बाबासाहेब ने हमें अधिकारों की जो विरासत सौंपी है, उसे हर पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है। इस बार की शोभा यात्रा अब तक की सबसे विशाल और अनुशासित रही।
जयंती समारोह की शुरुआत छात्रावास परिसर में स्थापित बाबासाहेब की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अंजनी कुमार समेत बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि बाबासाहेब का जीवन दर्शन केवल एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के उत्थान का मार्ग है।
डीजे और बैंड की स्वरलहरियों पर युवाओं की टोलियां घंटों झूमती रहीं। ‘बाबा तेरा मिशन अधूरा, हम सब मिलकर करेंगे पूरा’ जैसे नारों से वातावरण ओजस्वी हो उठा। शोभा यात्रा का मूल उद्देश्य बाबासाहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाकर उनके समतामूलक समाज के सपने को साकार करना था।

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