पटना 24 अप्रैल26*महात्मा सुशील ने दी परमात्मा साक्षात्कार की सूक्ष्म साधना पद्धति : माँ विजया
हवन-यज्ञ, अखण्ड साधना और सदगुरुमाँ के आशीर्वचन के साथ दो दिवसीय महानिर्वाण महोत्सव का भव्य समापन, देश-विदेश के हजारों इस्सयोगियों की सहभागिता
विनोद तकियावाला
पटना, 25 अप्रैल 26। अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्वावधान में ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के 24वें महानिर्वाण महोत्सव का समापन ‘गुरुधाम’ में हवन-यज्ञ, अखण्ड साधना, संकीर्तन और सदगुरुमाँ के आशीर्वचनों के साथ अत्यंत श्रद्धामय एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। देश-विदेश से आए हजारों इस्सयोगियों ने यज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कर गुरु-भक्ति, आस्था और साधना का अनुपम संगम प्रस्तुत किया।
संस्था की अध्यक्ष माँ विजया ने अपने आशीर्वचन में कहा कि परमात्मा प्रत्येक मनुष्य के अंतर में ही प्रतिष्ठित हैं, किन्तु मन की माया उसे उस सत्य से दूर किए रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमात्मा की प्राप्ति बाह्य आडंबरों से नहीं, बल्कि सूक्ष्म आंतरिक साधना से ही संभव है। महात्मा सुशील द्वारा प्रदत्त ‘इस्सयोग’ की साधना पद्धति वही दिव्य मार्ग है, जिसके माध्यम से साधक अपने कर्मबंधन को काटकर माया से मुक्त होकर मोक्ष की दिशा में अग्रसर हो सकता है। नियमित साधना को उन्होंने माली के जल के समान बताया, जो निरंतर सिंचन से जीवन रूपी पौधे को विकसित कर एक दिन उसे फल-फूल से परिपूर्ण कर देता है। उन्होंने कहा कि साधना के सतत अभ्यास से ‘ऋतंभरा प्रज्ञा’ जागृत होती है, जो मूल चेतना और ब्रह्म के साक्षात्कार का द्वार खोलती है।
संस्था के उपाध्यक्ष (मुख्यालय) बड़े भैया श्री संजय कुमार ने सद्गुरुदेव के आदर्श जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि ज्ञान और अज्ञान के बीच केवल ‘अहंकार’ का अंतर है। यदि साधक अहंकार का त्याग कर दे, तो साधना सहज रूप से फलित होने लगती है। उन्होंने कहा कि सद्गुरुदेव ने हमें अपने भीतर निहित चेतना को जागृत करने की शिक्षा दी, जिससे व्यक्ति जीवन के कठिनतम क्षणों में भी धैर्य और आनंद की अनुभूति कर सकता है। छोटे भैया संदीप ने हवन-यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी पवित्र अग्नि तन और मन के समस्त विकारों का शोधन करती है। उन्होंने कहा कि साधना और यज्ञ दोनों मिलकर व्यक्ति के आंतरिक शुद्धिकरण का माध्यम बनते हैं और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
पूर्वाह्न 10 बजे से आरंभ हुई 24 घंटे की अखण्ड साधना एवं संकीर्तन का समापन प्रातः आरती-गान के साथ हुआ। इस अवसर पर शिकागो की शुभ्रा राज, लंदन के मास्टर वैदिक एवं मास्टर भूपाल तथा बेगूसराय के चंदन कुमार को ‘महात्मा सुशील कुमार माँ विजया प्रोत्साहन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
संस्था के संयुक्त सचिव डॉ. अनिल सुलभ ने बताया कि हवन-यज्ञ में मुख्य यज्ञमान के रूप में बड़े भैया अपनी पत्नी रेणु गुप्ता के साथ उपस्थित रहे। इंग्लैंड, अमेरिका, मॉरीशस, नेपाल सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए बड़ी संख्या में इस्सयोगियों ने आहुति अर्पित की। कार्यसमिति की बैठक एवं महाप्रसाद के साथ यह दो दिवसीय दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव सम्पन्न हुआ, जिसने सूक्ष्म साधना के वैश्विक विस्तार को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

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