April 15, 2026

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*नई दिल्ली *१४ दिसंबर २५ *यूपीआजतक न्यूज़ चैनल पर देश विदेश की खबरे *..........

*नई दिल्ली *१४ दिसंबर २५ *यूपीआजतक न्यूज़ चैनल पर देश विदेश की खबरे *……….

*नई दिल्ली *१४ दिसंबर २५ *यूपीआजतक न्यूज़ चैनल पर देश विदेश की खबरे *……….

*🏵️मिसाइल, ड्रोन… इजरायल अब भारत में बनाएगा हाई टेक हथियार, शिफ्ट करेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, तुर्की-पाकिस्‍तान को जवाब*

*भारत और इजरायल अपने रक्षा संबंध को उस स्तर पर ले जा रहे हैं, जहां कोई ग्राहक या विक्रेता नहीं होता है। यानि, दोनों देशों के बीच पारंपरिक तौर पर हथियारों की खरीद बिक्री वाला रिश्ता बहुत जल्द पीछे छूटने वाला है और सिर्फ एक साल बाद इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा।*

* इजरायल अब अपनी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को भारत में शिफ्ट करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है
* इजरायल अपने हथियार ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बनाएगा
* इसके तहत हाई टेक ड्रोन समेत कई दूसरे एडवांस हथियार प्लेटफॉर्म शामिल हैं

*दोनों सरकारें, इजरायल के इनोवेशन इकोसिस्टम को भारत की इंजीनियरिंग ताकत के साथ मिलाकर ‘मेक इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड’ डिफेंस प्रोडक्ट्स बनाने पर काम कर रही हैं।*

■ यह बदलाव अगले छह महीने से एक साल में दिखने लगेगा। भारत के लिए ये एक एतिहासिक मौका होगा, क्योंकि पिछले कुछ सालों में इजरायल ने भारत को कई क्रिटिकल डिफेंस टेक्नोलॉजी दिए हैं। वहीं बराक-8 जैसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और एडवांस इजरायली ड्रोन भी भारत में ही बनते हैं।
■ इससे पहले दशकों से भारत डिफेंस सेक्टर में रूस पर निर्भर रहा है। रूस ने भारत को फाइटर जेट से लेकर पनडुब्बियां, टैंक और मिसाइलों की सप्लाई की है। लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत ने रूस पर अपनी निर्भरता कम की है। भारत ने अब इजरायल और फ्रांस जैसे देशों के साथ अपने रक्षा संबंध मजबूत किए हैं। खासकर इजरायल के साथ ये संबंध काफी गहरे हुए हैं।
■ इजरायल एक छोटा देश है और उसे डर लगा रहता है, कि दुश्मन उसके डिफेंस फैक्ट्रियों को युद्ध में निशाना बना सकते हैं, ऐसे में वो भारत जैसे विश्वसनीय भागीदार पर भरोसा कर रहा है, ताकि भारत में हथियारों का प्रोडक्शन हो और उसे हथियारों की कमी का सामना ना करना पड़े।
■ इसके अलावा भारत ने भी अपनी डिफेंस नीति को काफी हद तक बदल दिया है। भारत अब सिर्फ हथियार खरीदना नहीं चाहता है, बल्कि भारत का फोकस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मेक इन इंडिया हथियारों के उत्पादन पर फोकस है। भारत अब हथियारों का लोकल प्रोडक्शन चाहता है।
■ भारत में जो प्रोजेक्ट्स पहले से चल रहे हैं, उनमें जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों का ज्वाइंट प्रोडक्शन, स्ट्राइकर आर्मर्ड गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग और भारत की आर्म्ड फोर्सेज में MQ-9B ड्रोन्स का इंटीग्रेशन शामिल है।
■ यानि भारत अब हथियारों को सीधे खरीदने के बजाए उसे भारत में बनाने पर जोर दे रही है, ताकि भविष्य में भारत खुद एडवांस हथियारों को डेवलप कर सके और फिर उसका निर्यात कर सके, जैसा कि हम ब्रह्मोस मिसाइल और आकाश डिफेंस सिस्टम में देख रहे हैं।
■ इजरायली अधिकारियों ने कहा है कि इजरायल, UAV मिसाइलों, लोइटरिंग हथियारों, एयर डिफेंस और रडार और कम्युनिकेशन वगैरह के लिए पार्टनर ढूंढ रहा है। भारतीय निवेश की तुलना ‘एलिस इन वंडरलैंड’ से करते हुए, इजरायली कंपनी एल्बिट के कॉर्पोरेट ऑफसेट मैनेजर, ओरिमैगल ने इंडियन डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) को DPP वंडरलैंड की एलिस बताया।
■ इसके अलावा इजरायलियों को यह भी बताया गया है कि अगले दस सालों में भारतीय सेना 250 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार सिस्टम खरीदने वाली है। इसे पूरा करने के लिए भारत को एक एक्शन प्लान की जरूरत है। जबकि इस सदी के पहले दशक में इजरायल ने भारत को करीब 10 अरब डॉलर मिलिट्री इक्विपमेंट और सिस्टम ट्रांसफर किए थे।

*इजरायल का ये कदम भारत के दुश्मनों, खासकर पाकिस्तान और तुर्की को करारा जवाब है। तुर्की, पाकिस्तान में अपने एडवांस ड्रोन के कुछ हिस्से बनाने पर विचार कर रहा है, लेकिन अगर इजरायल अपना डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग ही भारत में शिफ्ट करता है, तो ये एक एतिहासिक कदम होगा।*

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