जोधपुर 11 मार्च 26*रीको : भ्रष्टाचार का अड्डा
-प्रदेश में 30 सालों में जमीनों का किया बंदरबांट। 429 औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का दावा, लगभग 95,273.36 एकड़ भूमि अधिग्रहित की। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 42 प्रतिशत भूमि पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ओने-पोने दामों में बड़े पूंजीपतियों को जमीन लुटाता रहा रीको। रीको की कई मौके की जमीनों पर बेशकीमती शोरूम, आवासीय बिल्डिंगें और संस्थानिक गतिविधियां वर्षों से चल रही है। रीको के अधिकारी दादागिरी से चौथ वसूली करते रहे।
अब फिर भूमि उपयोग परिवर्तन की ड्रामेबाजी- जबकि अकेले जोधपुर में एमआईए बासनी/हैंडीक्राफ्ट, फेज-1, एमआईए बासनी, फेज-2, न्यू जोधपुर (टीए), सांगरिया 1, 2, भगत की कोठी व इंडस्ट्रियल स्टेट (टीए), हैवी व लाइट इंडस्ट्रियल एरिया (टीए), इलेक्ट्रिक कॉम्प्लेक्स (टीए), सायबर पार्क में रीको की जमीन पर आवासीय, कॉमर्शियल और संस्थानिक गतिविधियां वर्षों से चल रही, रीको ने वर्षों से ओढ़ी मौन…।
-रीको ने गत 30 साल में 40.86 अरब से ज्यादा का लोन लुटाया, वसूली में फेल, भूखंड बेचकर प्रॉफिट दिखाता रहा…मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के नाम पर अफसरों ने घर भर लिए। राजस्थान में रीको में जितना भ्रष्ट तंत्र का जाल है, उसका हिसाब लगाने लग जाए तो बही-खाते छोटे पड़ जाए…राजस्थान में रीको की अधिसंख्य भूमि बड़े-बड़े पूंजीपतियों ने ओने-पोने दामों में वर्षों पूर्व खरीदकर रख ली है और ना ही उद्योग लगे और ना ही औद्योगिक गतिविधियों में उपयोग ली जा रही, अब उसका भूमि उपयो रूपांतरण का खेल शुरू। यही नहीं रीको की बड़ी जमीन पर कई भूमाफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे रीको छुड़ाने की बजाय चौथ वसूली कर रहा है।
लाइव रिपोर्ट | जोधपुर से दिलीप कुमार पुरोहित
राजस्थान में औद्योगिक विकास के लिए बनाई गई संस्था Rajasthan State Industrial Development and Investment Corporation को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पिछले तीन दशकों में औद्योगिक विकास के नाम पर जमीनों का बड़ा खेल हुआ और अब भूमि उपयोग परिवर्तन के जरिए नया आर्थिक मॉडल तैयार किया जा रहा है।
सूत्रों और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रीको ने प्रदेश में अब तक 429 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का दावा किया है और लगभग 95 हजार एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहित की है। लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में से करीब 42 प्रतिशत भूमि पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है।
इसी दौरान रीको ने करीब 40.86 अरब रुपए से अधिक का लोन विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को दिया, लेकिन वसूली के मामले में स्थिति कमजोर बताई जा रही है। आरोप है कि लोन की वसूली में सख्ती नहीं बरती गई और कई मामलों में समझौते के जरिए फाइलें बंद कर दी गईं।
जोधपुर में भी कई औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एमआईए बासनी, न्यू जोधपुर, सांगरिया, भगत की कोठी, हैवी और लाइट इंडस्ट्रियल एरिया तथा सायबर पार्क जैसे क्षेत्रों में वर्षों से कॉमर्शियल, आवासीय और संस्थानिक गतिविधियां चल रही हैं। बावजूद इसके, लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हाल ही में रीको ने अक्टूबर 2025 में दो अहम आदेश जारी किए। पहले आदेश में औद्योगिक भूमि की कीमतें लगभग 1.8 गुना तक बढ़ा दी गईं। इसके बाद दूसरे आदेश में औद्योगिक भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन को फिर से मंजूरी दे दी गई, हालांकि इसके लिए शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र में पहले जहां जमीन का आवंटन करीब 5000 रुपए प्रति वर्गमीटर था, अब यह बढ़कर 9000 रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि उपयोग परिवर्तन से कई पुराने भूखंडों को कॉमर्शियल और रेजिडेंशियल उपयोग में बदलने का रास्ता खुल सकता है, जिससे बड़े निवेशकों को लाभ मिल सकता है।
फिलहाल सवाल यह उठ रहा है कि क्या औद्योगिक विकास के लिए बनाई गई व्यवस्था वास्तव में उद्योगों को बढ़ावा दे पाई है या फिर जमीन और नीतियों के इस खेल में पारदर्शिता की जरूरत है।

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