कौशाम्बी30सितम्बर25*जटायु ने प्राण देकर भी निभाई धर्म रक्षा की मर्यादा*
*लक्ष्मण ने खीचीं मर्यादा रेखा नही लांघ सके लंकापति रावण स्वर्ण मृग की लुभावनी छवि से सीता हुईं मोहित*
*कौशाम्बी।* मुख्यालय मंझनपुर स्थित हिन्दु धर्म सभा श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में सीता हरण सेवरी निवास का मंचन किया गया, मंचन में प्रभु श्रीराम मुनि के साथ आश्रम पहुंचते हैं। मुनि पंचवटी में कुटी बनाकर राम, सीता और लक्ष्मण के रहने की व्यवस्था कराते हैं। यहीं पर रावण की बहन सूर्पनखा आती है, लक्ष्मण उसकी नाक काट लेते हैं। कटी नाक लेकर सूर्पनखा खर दूषण के पास जाती है। प्रभु राम और खर दूषण के बीच युद्ध होता है जिसमें दोनों भाइयों का वध प्रभु राम के हाथों होता है। इसके बाद सूर्पनखा रावण के दरबार में खर दूषण के मारे जाने की सूचना देती है। लंका पति द्वारा सीता का हरण कर लिया जाता है, मंचन को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में भीड़ जमा रही बताते चले कि मंझनपुर के रामलीला मैदान में श्रीराम लीला का मंचन किया जा रहा है। सोमवार को सीता हरण का मंचन किया गया, मंचन में दिखाया जाता है कि सूर्पणखा की नाक लक्ष्मण द्वारा नाम कटना और खर दूषण का वध की लीला दिखाई है। सूर्पणखा ने घायल अवस्था में अपने बड़े भैया लंका के राजा रावण के दरबार में पहुंच कर आपबीती सुनाई। तब जाकर रावण अपने मामा मारीच को एक स्वर्ण मृग का रूप धारण करके पता लगाने को कहता है। मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण करके जैसे ही जाता है तो माता सीता राम एवं लक्ष्मण से उस मृग को पाने की इच्छा जाहिर करती है तब लक्ष्मण जी अपने आश्रम के चारो ओर एक रेखा खींचकर उस मृग का पीछा करने लगते है राम उस पर बाण चला देते पर मृग अंतरध्यान हो जाता है और इधर पुकार सुन माता सीता द्वारा उन्हे विवस कर राम की सुरक्षा के लिए लक्ष्मण को भेजी है। लक्ष्मण कुटी के चारो तरफ एक रेखा खिचकर रेखा के बाहर आने से मना कर राम की सुरक्षा के लिए जाते है। रामायण कपटी साधु का भेष धरकर माता सीता का हरण कर आकाश मार्ग से ले जाता है इसी बीच रास्ते में जटायु से उसका युद्ध होता है माता सीता को बचाने के लिए जटायु अपनी जान लगा देता है रावण द्वारा तलवार से जटायु के पंख काटे जाने पर जटायु पृथ्वी पर गिर जाता है रावण द्वारा जटायु के पंख काटने का मार्मिक दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो गए। इधर श्रीराम माता सीता को खोजते हुए मतंग मुनि के आश्रम में पहुंचे। यहां श्रीराम की भेंट शबरी से हुई। सबरी ने राम को चख-चख कर झूठे बेर खिलाएं। राम को पा कर शबरी की खुशी नही समा रही थी। शबरी के आतिथ्य से प्रसन्न हो भगवान ने उन्हें नवदा भक्ति प्रदान की।

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