कौशाम्बी05जनवरी24*दिव्यांग दंपत्ति रोती रही.. गिड़गिड़ाती रही लेकिन प्रशासन का नही पसीजा दिल, चलाया बुल्डोजर*
*कड़कड़ाती ठंड में बेरहम हुआ प्रशासन छीन लिया दिव्यांग दंपत्ति से उसका ठिकाना..*
*बड़े साहब डीएम साहब ने कहा था वे हमे घर देंगे फिर ये घर=गिरवाएंगे..साहब..साहब..साहब सुन लीजिए..*
*अझुवा कौशांबी* जिस कड़कड़ाती ठंड में सरकार गरीबों को लेकर संजीदा है वो हर मुमकिन कोशिश में जुटी है जिससे इस कड़कड़ाती ठंड में कठिनाइयों से जीवन बसर न करने पड़े। लेकिन वहीं सिराथू तहसील का प्रशासन है जिसे इस कड़कड़ाती ठंड में बेरहम प्रशासन के कान में एक दिव्यांग दंपत्ति रामसिंह मौर्या की आवाज नहीं सुनाई पड़ी और जेसीबी से उसके सामने ही उसके झोपड़ी नुमा आशियाने को जमींदोज कर दिया। जिससे दिव्यांग दंपति खुले आसमान के नीचे इस ठंड में रहने को मजबूर है
पीड़ित का आरोप शुक्रवार की दोपहर जिला पंचायत कर्मचारी के साथ पहुंचे नायब तहसीलदार संजय ने बिना अग्रिम नोटिस दिए भीषण ठंड में बुलडोजर लगाकर दिव्यांग गरीब का झोपड़ी नुमा आशियाना ढहा दिया। मालूम हो जिला पंचायत की खाली पड़ी भूमि पर दिव्यांग ने विगत 25 साल से उस मकान में निवास कर रहा था। मकान देखने के बाद ही उसकी गरीबी का अंदाजा लगाया जा सकता है की 25 सालों में ईंट की केवल दिवाल ही उठ सकी थी लेकिन उस दिवाल पर पक्की छत नही पड़ सकी थी बल्कि टीन शेड डालकर किसी तरह परिवार के साथ गुजर बसर कर रहा था फिर भी जिला पंचायत प्रशासन को अखर गया। हालांकि एक बार कई माह पहले मिले नोटिस के बाद दिव्यांग ने जिलाधिकारी की चौखट पर अपनी व्यथा सुनाई, जिसे सुन जिलाधिकारी ने जिला पंचायत से उसे आशियाना देने की बात कही मगर जिला पंचायत ने ऐसी कोई सुविधा नहीं है कह कर पल्ला झाड़ लिया, और नायब तहसीलदार के साथ पहुंचकर गरीब दिव्यांग के आशियाने पर बुल्डोजर चलवा दिया।
*👉पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती दिव्यांग, नही पसीजा साहब का दिल*
*अझुवा कौशाम्बी* कौन कहता है गरीबों के भी हाकिम होते है पैर पकड़ बिलखती महिला के जब स्वजातीय सूबे के मुखिया डिप्टी सीएम केशव प्रसाद जैसे कद्दावर नेता हो फिर भी गरीब दिब्यांग बेसहारा रामसिंह मौर्य की पत्नी नायब तहसीलदार संजय कुमार का पैर पकड़ चीखती चिल्लाती रहम की भीख मांगती रही। मगर साहब का दिल नहीं पसीजा। जिसे देख उन जातिवादियों पर सवाल उठाना लाजिमी है जो पैसे और रूतबे के बल पर अपना तो भरण पोषण करते है मगर बेसहारा गरीबों को बीच रास्ते में छोड़ दिया जाता है चीखने, चिल्लाने और रोने के लिए।

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