कानपुर नगर मौसम सूचना विभाग
कानपुर14दिसम्बर23*उतार-चढ़ाव भरे जलवायु सम्मेलन में हुआ समझौता जिसने बढ़ाई विकासशील देशों की चिंता
दुनिया के लगभग 200 देश एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते पर पहुंच गए हैं, जिसके तहत ईंधन के लिए कोयले, तेल और गैस के इस्तेमाल को धीरे-धीरे ख़त्म किया जाएगा.
लेकिन कुछ विकासशील देश इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस समझौते की बारीक़ शर्तें कमज़ोर हैं और इस समझौते को लागू करने के लिए करना क्या है ये भी स्पष्ट नहीं है.
इस साल दुबई में जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर आयोजित हुए सीओपी28 का एक ही प्रमुख मक़सद था कि दुनिया को उसी रास्ते पर वापस लाया जाए जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जा सके.
लेकिन, जब परिचर्चाएं ख़त्म हुईं और लोगों का ग़ुस्सा बढ़ने लगा, तो ऐसा लगा कि ये योजना खटाई में पड़ गई है.
आख़िरी मौक़े तक ये शिखर सम्मेलन बहुत हद तक इस सवाल तक सिमट कर रह गया था कि अंत में समझौता होगा या नहीं. सम्मेलन के दौरान कोई समझौता होने के लिए ये बेहद ज़रूरी था कि इसमें शामिल सभी 198 देश या तो किसी बयान पर सहमत हों या फिर ख़ाली हाथ लौट जाएं.

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