March 30, 2026

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औरैया11जून*महंगाई की मार से कराह रहा जनमानस*

औरैया11जून*महंगाई की मार से कराह रहा जनमानस*

औरैया11जून*महंगाई की मार से कराह रहा जनमानस*

*फलों सब्जियों दालों एवं रोजमर्रा काम आने वाली वस्तुओं पर महंगाई की मार*

*औरैया।* बेशक केंद्र और प्रदेश सरकार महंगाई कम करने का दम्भ भर रही हो लेकिन आए दिन बढ़ रही महंगाई से आम जनमानस पूरी तरह कराह रहा है। हालात यह हैं कि पेट्रो पदार्थों या फिर खान-पान से लेकर जरूरी उपयोग के सामान, इन सभी पर महंगाई पूर्णतया हावी है। इन सब से अलग हटकर दाल , सब्जी और फलों के दाम भी सातवे में आसमान छू रहे हैं। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार के सामने अपना परिवार चलाना बड़ी मुसीबत हो गया।
केंद्र व प्रदेश की सरकार भले ही महंगाई कम करने का दम्भ भर रही हो , लेकिन हकीकत कुछ अलग ही है। इस महंगाई के दौर में आम आदमी की थाली से दालें व सब्जियां गायब हो रही हैं , वहीं फल भी काफी महंगे है। पेट्रो पदार्थों में आई तेजी के कारण महंगाई तेजी से बढ़ रही है , जिसके कारण मध्यम बर्गीय लोगों का दिवाला निकला जा रहा है। जहां मध्यम वर्ग के लोगों को खाने कमाने के लाले पड़े हैं , वही इस महंगाई के दौर में उन्हें बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। बाजारों में अरहर , उड़द , मूंग , चना व मसहूर आदि की दालें बेतहाशा महंगी हो गई है। वही फलों व सब्जियों के दाम भी सातवें आसमान पर चढ़कर बोल रही हैं। जिसके कारण मध्यम वर्ग के लोगों की थाली से उपरोक्त स्वास्थ्यवर्धक वस्तुएं दूर होती जा रही हैं। बाजार में अरहर की दाल प्रति किलो 100 से 120 रुपये, उर्द 110 से 130 रुपये, मांग 100 से 125 रुपये, चना 70 से 90 रुपये है। वही कडआ सरसों का तेल 175 है। इसके अलावा 1 घरेलू वस्तुएं भी काफी महंगी है। इसी तरह से सब्जियों के प्रति किलो भाव आलू 20 रुपये, पलवल 80 रुपये, टमाटर 60 रुपये, घीया 40 रुपये, करेला 40 रुपये, मूली 30 रुपये, कटहल 60 रुपये, पत्तादार प्याज 60 रुपये व नींबू 120 रुपये बिक रहे हैं। जबकि बैंगन , भिंडी , तरोई , लौकी, कुंदरू व कद्दू आदि 20 से 30 रुपये के भाव से बिक रहे हैं। इसी तरह से फलों के भाव प्रति किलो आम 50 से 60 रुपए , सेव 100 रुपये, अनार 100 से 120 रुपये, लीची 80 से 100 रुपये, केला 40 रुपये बिक रहे हैं। इस प्रकार इस कमरतोड़ महंगाई नहीं मध्यम वर्ग के लोगों को बुरी तरह से परेशान कर रखा है। मध्यम वर्गीय लोगों को अपने परिवार के उदर भरण की चिंता सता रही है। केंद्र व प्रदेश की सत्तारूढ़ सरकार को मध्यम वर्गीय लोगों की इन समस्याओं से कोई सरोकार होना प्रतीत नहीं हो रहा है , जिसके कारण महंगाई निरंतर अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच रही है। शहरी व ग्रामीणांचल क्षेत्र के मध्यम वर्गीय लोगों का कहना है कि यदि महंगाई इसी प्रकार से बढ़ती रही तो उन्हें अपने बच्चों के पठन-पाठन से मजबूर होना पड़ेगा।