औरैया 19 जून *राजनैतिक आपाधापी के बीच कुचल गये बाल श्रमिकों के अधिकार*
*अब तक की सरकारों ने श्रमिकों के साथ मजदूरी की अनदेखी की*
*औरैया।* भारत सरकार ने बालश्रम कानून बनाकर भारतीय श्रमिक समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ उनके अधिकारों को जहां एक और सजग किया,वहीं दूसरी ओर देश व प्रदेश की चंद स्वार्थी राजनेताओं के कुचक्र से श्रम कानून को धता बताते हुए बाल श्रम निरोधक कानून को बाल श्रम करवाने की तादाद में बढ़ोतरी होना देश व प्रदेश की सरकारों पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
स्वतंत्र भारत में देश व प्रदेश की सरकारों ने अब तक उनकी हक व अधिकारों को कुचल कर आज के लोकतंत्र के गाल पर तमाचा मारा है , और तेजी से लोकतांत्रिक ढंग से नन्हे मुन्ने अबोध बच्चों को स्कूल की जगह पर होटलों , ईट भट्टों तथा जमीदारों के यहां बाल श्रम के लिए मजबूर होना पड़ता है। उपरोक्त विचार भारतीय श्रमिक समाज कल्याण समिति के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राम प्रकाश शर्मा ने व्यक्त करते हुए कहा है कि केंद्र व प्रदेश की सरकारों ने बाल श्रम को रोकने के लिए जो प्रस्ताव लाकर कार्य किया था उसके मुताबिक कई दशक बीत जाने के उपरांत भी इसे लागू नहीं करा पाई। जिसके पीछे या तो गरीब मजदूरों और श्रमिकों एवं बाल मजदूरों का दोहन कैसे हो सके अथवा उनके अधिकारों को कैसे जनता में छुपाया जा सके राजनैतिक षड्यंत्रकारी प्लान जारी रखा और लाखों श्रमिकों , मजदूरों के हकों पर डाका डालने वाले सफेदपोश नेता ही आडे़ आये। उन्होंने देश व प्रदेश की उन लाखों श्रमिकों व मजदूरों एवं बाल अपराध बाल श्रम करने को विवश लोगों को सावधान करते हुए कहा कि अब देर भले लेकिन “जागो तभी सवेरा” मानकर दगाबाज सफेद पोश सरकारों में बैठे जिम्मेदार नेताओं से अपने हक और अधिकारों को छीनने के लिए हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर आ जाएं तथा अपनी श्रमिक शक्ति से देश व प्रदेश की सरकारों की नाक में नकेल डालने से ना चुके , तभी देश व प्रदेश के श्रमिको मजदूरों एवं अबोध बच्चों का कल्याण हो सकेगा।

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