इटावा 13 अप्रैल 26* एडवोकेट निधि पाल की जुबानी, जलियाँ वाले बाग की कहानी।
इटावा *
नमस्कार, आप देख रहे हैं यूपी आजतक न्यूज़ चैनल, मैं हूं निधि पाल, एडवोकेट।
आज हम आपको ले चलेंगे इतिहास के उस काले अध्याय की ओर, जिसे याद करते ही हर भारतीय का दिल दहल उठता है — जलियाँवाला बाग हत्याकांड।
13 अप्रैल 1919, बैसाखी का दिन… अमृतसर का जलियाँवाला बाग…
हजारों लोग शांति पूर्वक इकट्ठा हुए थे — अपने अधिकारों की आवाज़ उठाने के लिए।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि कुछ ही पलों में यह जगह खून की धरती बन जाएगी।
ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के, निहत्थे और निर्दोष लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।
करीब 10 मिनट तक लगातार गोलियां चलीं…
लोग भागने की कोशिश करते रहे, लेकिन चारों तरफ बंद रास्ते…
कई लोग जान बचाने के लिए कुएं में कूद गए।
इस भयावह घटना में सैकड़ों लोग शहीद हो गए, और हजारों घायल हुए।
यह केवल एक हत्याकांड नहीं था, बल्कि अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता का सबसे बड़ा उदाहरण था।
जलियाँवाला बाग ने पूरे देश को झकझोर दिया…
और यही घटना बनी भारत की आजादी की लड़ाई में एक बड़ा मोड़।
आज भी जब हम उस स्थान पर जाते हैं, तो दीवारों पर गोलियों के निशान और शहीदों की यादें हमें उस दर्दनाक दिन की कहानी सुनाती हैं।
आइए, उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें आज़ादी की राह दिखाई।
मैं हूं निधि पाल, एडवोकेट,
आप देख रहे थे यूपी आजतक न्यूज़ चैनल।
धन्यवाद।

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