अरिद्वार 15सितम्बर 25*क्यो हमारे पुर्वज पितृपक्ष मे कौवों के लिए खीर बनाने को कहते थे…….?
हरिद्वार से कालूराम की खास खबर..
पीपल ओर बरगद को सनातन धर्म मे पूर्वजों की संज्ञा दी गई है।
आपने किसी भी दिन पीपल और बरगद के पौधे लगाए हैं……..?
या किसी को लगाते हुए देखा है………?
क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं…..?
इसका जवाब है नहीं….!
बरगद या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु नहीं लगेगी।
कारण प्रकृति/कुदरत ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।
यह दोनों वृक्षों के फल कौवे खाते हैं और उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसीग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं। उसके पश्चात कौवे जहां-जहां बीट करते हैं, वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं।
पीपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन छोड़ता है और बरगद के औषधि गुण अपरम्पार है।
देखो अगर यह दोनों वृक्षों को उगाना है तो बिना कौवे की मदद से संभव नहीं है इसलिए कौवे को बचाना पड़ेगा।
और यह होगा कैसे?
मादा कौआ भादो महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।
तो इस नयी पीढ़ी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है इसलिए ऋषि मुनियों ने
कौवों के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार की व्यवस्था कर दी।जिससे कि कौवों के नवजात बच्चो का पालन पोषण हो जाये….🙏

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