अयोध्या11जुलाई26*दुख की हर दहलीज पर पहुंचे रुश्दी मियां, पीड़ित परिवारों को दी आर्थिक मदद
रुदौली क्षेत्र के 8: विभिन्न गांवों का दौरा कर शोकाकुल परिजनों से मिले, घायलों का जाना हाल
जनप्रतिनिधि का धर्म लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ा होना” — रुश्दी मियां
भेलसर(अयोध्या)समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री एवं रुदौली के पूर्व विधायक सैय्यद अब्बास अली जैदी ‘रुश्दी मियां’ ने शनिवार को विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा कर हादसों और असामयिक मौतों से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की।उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना देने के साथ आर्थिक सहायता प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया। उनके इस संवेदनशील कदम की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।
दौरे की शुरुआत दुल्लापुर गांव से हुई, जहां आकस्मिक निधन का शिकार हुए हरिश्चंद्र रावत के परिजनों से मिलकर उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की और आर्थिक सहयोग दिया। इसके बाद वह पुराय गांव पहुंचे, जहां चाकूबाजी की घटना में घायल हुई सुशीला देवी चौहान का हालचाल जाना तथा उपचार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की।
इसके बाद ग्राम डिहवा मजरे पूरे कलहंस में करंट लगने से मृत उदयराज लोधी के परिवार से मिलकर शोक व्यक्त किया और आर्थिक सहायता दी। पूरे लोधन पुरवा में बीमारी से अस्वस्थ रामजस यादव उर्फ भंडारी का हाल जाना तथा इलाज के लिए आर्थिक मदद की। वहीं सैदपुर स्थित मां कामाख्या धाम क्षेत्र में आकस्मिक निधन के शिकार राजकुमार गौतम के परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और आर्थिक सहायता सौंपी।
रुश्दी मियां ने छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल श्रीराम लोधी के घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए सहयोग राशि प्रदान की। इसके बाद वह मत्था नेवादा गांव पहुंचे, जहां मुंबई में कार्य के दौरान करंट लगने से मृत 22 वर्षीय सुजीत गौतम के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पिता गोमती प्रसाद गौतम सहित परिवार के सदस्यों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। अंत में दुल्लामऊ मजरे अमराई गांव पहुंचकर रामप्रकाश यादव के पुत्र के असामयिक निधन पर परिवार को सांत्वना दी।
रुश्दी मियां ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने का अर्थ केवल राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाना नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनना भी है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछना और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। स्थानीय लोगों ने कहा कि दुख की घड़ी में रुश्दी मियां का परिवारों के बीच पहुंचना उनके लिए बड़ा संबल साबित हो रहा है और उनका यह मानवीय प्रयास सामाजिक संवेदनशीलता की मिसाल बन गया है।

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