October 1, 2026

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हरिद्वार30 सितम्बर 26*निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने समेत कई मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

हरिद्वार30 सितम्बर 26*निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने समेत कई मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

हरिद्वार30 सितम्बर 26*निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने समेत कई मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

हरिद्वार से कालूराम जयपुरिया की रेपोर्ट यूपीआजतक 

हरिद्वार। भारत के निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर सीपीआई तथा सीपीआई (एम) ने हरिद्वार में विरोध प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति के नाम नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। साथ ही निर्वाचन आयोग की गरिमा और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली बहाल करने, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा मतदाता सूची से कथित रूप से बाहर किए गए लोगों के मतदान अधिकार को बहाल करने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के संचालन में निर्वाचन आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ज्ञापन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से निर्वाचन आयोग से संबंधित उठाए जा रहे सवालों का संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
ज्ञापन में दावा किया गया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान भारत के निर्वाचन आयोग में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR तथा मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े फैसलों को लेकर निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों ने इन प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न निर्णयों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। ज्ञापन में इन आपत्तियों की संख्या 14 तक बताए जाने का दावा किया गया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा कुछ निर्णय अन्य निर्वाचन आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। प्रदर्शनकारियों ने इसे निर्वाचन आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
ज्ञापन में विपक्षी तथा वामपंथी दलों द्वारा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। उनका कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न हो।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम दिए गए ज्ञापन में कुल कई प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की रही। दूसरी मांग निर्वाचन आयोग के कामकाज में केंद्र सरकार के कथित अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने तथा आयोग की संवैधानिक गरिमा बहाल करने की है।
तीसरी प्रमुख मांग एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसे दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए और उसके मतदान के अधिकार को बहाल किया जाना चाहिए।
इसके अलावा निर्वाचन आयोग की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को मजबूत करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के प्रति जनता का भरोसा मजबूत हो।
ज्ञापन में अनूप बर्नवाल मामले का भी उल्लेख किया गया और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करते हुए चयन समिति की व्यवस्था किए जाने की मांग रखी गई। साथ ही निर्वाचन आयोग की कथित संदिग्ध गतिविधियों और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने की।
प्रदर्शनकारियों ने भविष्य में सभी चुनाव कागजी मतपत्रों के माध्यम से कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि इससे आम मतदाताओं के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर विश्वास कायम करने में मदद मिलेगी।
ज्ञापन के अंत में राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि निर्वाचन आयोग से जुड़े इन सभी मुद्दों का संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भारतीय लोकतंत्र की संस्थागत अखंडता और निर्वाचन आयोग की गरिमा को मजबूत किया जा सके।
यह प्रदर्शन सीपीआई और सीपीआई (एम) से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा किया गया। ज्ञापन पर सीपीआई हरिद्वार के जिला मंत्री मुनिरिका यादव तथा सीपीआई (एम) हरिद्वार के जिला मंत्री सत कुमार के नाम दर्ज हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में जनता का विश्वास लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर उठने वाले प्रत्येक सवाल पर संवैधानिक स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
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हरिद्वार में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, राष्ट्रपति के नाम नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन, SIR प्रक्रिया पर रोक और मतदाता अधिकार बहाल करने की मांग, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल।
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नोट: आपके मूल ज्ञापन में निर्वाचन आयुक्तों के नाम और उनके द्वारा कथित आपत्तियों से संबंधित तथ्य दिए गए हैं। मैंने उन्हें सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञापन में किए गए दावे के रूप में लिखा है।

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