July 26, 2026

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हरिद्वार26जुलाई26*चर्च की करोड़ों की संपत्ति के कथित फर्जीवाड़े का मामला, हरिद्वार में FIR दर्ज*

हरिद्वार26जुलाई26*चर्च की करोड़ों की संपत्ति के कथित फर्जीवाड़े का मामला, हरिद्वार में FIR दर्ज*

*बड़ी खबर |

हरिद्वार26जुलाई26*चर्च की करोड़ों की संपत्ति के कथित फर्जीवाड़े का मामला, हरिद्वार में FIR दर्ज*

*लखनऊ डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन की संपत्ति को आगरा डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन की बताकर बेचने का आरोप, ₹2 करोड़ का लोन लेने का भी दावा*

हरिद्वार *उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के कोतवाली रुड़की में चर्च की संपत्ति से जुड़े एक कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। इस मामले में दर्ज एफआईआर के बाद चर्च जगत में हलचल मच गई है। शिकायत के अनुसार लखनऊ डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन (LDTA) की लीज पर दी गई संपत्ति को कथित रूप से आगरा डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन (ADTA) की संपत्ति बताकर फर्जी तरीके से बेचा गया और बाद में उसी भूमि के आधार पर बैंक से लगभग ₹2 करोड़ का ऋण भी प्राप्त कर लिया गया।

एफआईआर के अनुसार संबंधित भूमि वर्ष 1988 में लखनऊ डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन द्वारा 30 वर्ष की लीज पर दी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लीजधारक को केवल भूमि के उपयोग का अधिकार था, स्वामित्व का नहीं। इसके बावजूद कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए पहले संपत्ति का फर्जी बैनामा कराया गया, फिर उसे एक निजी कंपनी के नाम हस्तांतरित कर दिया गया।

आरोप है कि इसके बाद उक्त संपत्ति को बैंक में गिरवी रखकर लगभग ₹2 करोड़ का लोन लिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूरे मामले में दस्तावेजों के साथ धोखाधड़ी कर वास्तविक स्वामित्व को छिपाया गया और ट्रस्ट की संपत्ति का कथित रूप से अवैध लाभ उठाया गया।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) तथा धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर में कई व्यक्तियों एवं एक कंपनी को नामजद किया गया है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस संपत्ति का वास्तविक स्वामित्व लखनऊ डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन के पास था, उसे आगरा डायोसिस ट्रस्ट एसोसिएशन की संपत्ति के रूप में प्रस्तुत कर कथित तौर पर बेचा गया। मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं और पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही।

नोट: यह समाचार उपलब्ध एफआईआर में दर्ज आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।