August 11, 2026

UPAAJTAK

TEZ KHABAR, AAP KI KHABAR

लखनऊ10अगस्त26*राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भेजा मुख्यमंत्री को ज्ञापन*

लखनऊ10अगस्त26*राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भेजा मुख्यमंत्री को ज्ञापन*

लखनऊ10अगस्त26*राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भेजा मुख्यमंत्री को ज्ञापन*
________________________

👉*समस्याओं का निराकरण करने का किया अनुरोध*

👉*संयुक्त परिषद आंदोलन करने पर कर रही है विचार*

*लखनऊ*। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज लखनऊ में अवगत कराया है कि संयुक्त परिषद ने कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री के आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक पत्र भेज कर संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि कर्मचारियों की समस्याएं विगत दो वर्षों से भी अधिक समय से लंबित हैं। मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक से दर्जनों अनुरोध के बावजूद भी कर्मचारियों की समस्याओं का संज्ञान नहीं लिया जा रहा है।

विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को नहीं भरे जाने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार अधिक बढ़ गया है, जिसका प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।संयुक्त परिषद द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार कार्यभार की अधिकता के कारण 10 से 15% कर्मचारी अवसाद का शिकार हो रहे हैं। समय से पदोन्नतियां नहीं किए जाने से कर्मचारियों में कुंठा व्याप्त हो रही है। केंद्रीय आठवें वेतन आयोग का गठन हो गया है, उसकी रिपोर्ट कभी भी आ सकती है।

लेकिन उत्तर प्रदेश में वेतन समिति 2016 की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति में दर्जनों संवर्गों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां लंबित पड़ी हुई है। 2001 के बाद सृजित पदों के सापेक्ष विज्ञापित पदों पर नियमानुसार गठित चयन समिति के माध्यम से नियुक्त संविदा कर्मियों को नियमित करने की कोई नियमावली विगत 25 वर्षों में जारी नहीं की गई है।

पुरानी पेंशन की बहाली नहीं किए जाने से नई पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारियों को परेशानी हो रही है उनको गंभीर बीमारियों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति अथवा कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने, आशा बहू, आंगनवाड़ी तथा नियत मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय निर्धारित किए जाने सहित कर्मचारियों की मांगों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि चुनावी वर्ष है ।चुनावी वर्ष में सरकार उदारता के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रही है, लेकिन कर्मचारियों के बारे में सरकार के पास इस तरह की कोई कार्य योजना नहीं है।

उन्होंने आगे कहा है कि प्रदेश के 12 लाख राज्य कर्मचारी, 16 लाख पेंशनर्स एवं अधिशासी निकायों में कार्य करने वाले कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी तथा असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों में सरकार के प्रति भारी आक्रोश है। सरकार के सक्षम स्तर पर कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद हीनता बनी हुई है प्रशासनिक अधिकारी असंवेदनशील हो गए हैं तथा कर्मचारियों की समस्याओं पर कोई बात नहीं हो रही है। प्रमुख सचिव कार्मिक का रवैया तानाशाही की हद तक है।

उन्होंने कार्मिक विभाग से नियंत्रित होने वाले संगठनों के पदाधिकारियों के नियमानुसार जारी होने वाले सचिवालय प्रवेश पत्र पर रोक लगाकर प्रजातांत्रिक तरीके से समस्याओं के निस्तारण के लिए आपसी बातचीत का रास्ता भी बंद कर दिया है।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री को सारी स्थितियों से अवगत कराते हुए अनुरोध किया है कि प्रजातंत्र में संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया को बंद नहीं किया जाना चाहिए। बहुत सी समस्याओं का समाधान आपसी बातचीत के माध्यम से हो जाता है, परंतु उच्च प्रशासनिक स्तर पर संवाद हीनता के कारण कर्मचारियों की समस्याएं लंबित हो रही हैं तथा कर्मचारियों को आंदोलन करने पर विवश किया जा रहा है।

जे एन तिवारी ने कहा है कि शीघ्र ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें आने वाले समय में कर्मचारियों की भूमिका पर गहन विचार किया जाएगा। इस बात पर भी मंथन किया जाएगा कि आने वाले चुनाव में कर्मचारी किस विचारधारा के साथ कार्य करेंगे। जे एन तिवारी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से कर्मचारियों के मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध भी किया है। यह विज्ञप्ति राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की मीडिया प्रभारी अरुणा शुक्ला द्वारा जारी की गई है।

Taza Khabar